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वायु प्रदूषण से बचना है तो कीजिए ‘प्रणायाम’

Written by News Bureau

देश में बढ़े रहे वायु प्रदूषण से बचने के लिए वैसे तो कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन इससे बचने का अच्छा तरीका होता है प्रणायाम। कुछ प्रणायाम से आप अपने शरीर को प्रदूषित होने से बचा सकते है।

कपालभाति प्राणायाम– इसके लिए पालथी लगाकर सीधे बैठें, आंखें बंदकर हाथों को ज्ञान मुद्रा में रख लें।  कपालभाति के बाद मन शांत, सांस धीमी व शरीर स्थिर हो जाता है। इससे खून में आक्सीजन की मात्रा बढ़कर रक्त शुद्ध होने लगता है।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम- अनुलोम-विलोम प्राणायाम में नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं, तो बाएं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते है। इस क्रिया को पहले 3 मिनट तक करे और बाद में इसका अभ्यास 10 मिनट तक करे। इस प्रणायाम को आप खुली हवा में बैठकर करें। रोजाना इस योग को करने से फेफड़े शक्तिशाली बनते हैं। इससे नाडि़यां शुद्ध होती हैं और शरीर स्वस्थ, कांतिमय और शक्तिशाली बनता है।

सूर्यभेदी प्राणायाम- सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। आंखें बंद रखें। बाएं हाथ को बाएं घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रखें, फिर दाएं हाथ की अनामिका से बाएं नासिका के छिद्र को दबाकर बंद करें। फिर दाई नासिका से जोर से श्वास अंदर लें। अपनी क्षमता अनुसार श्वास रोकने का प्रयास करें। फिर दाएं नासिका के छिद्र को बंद कर बाएं नासिका छिद्र से श्वास निकालें। प्रारंभ में इसके कम से कम 10 चक्र करें और धीरे-धीरे जब आप अभ्यस्त हो जाएं, तो इसके चक्र बढ़ा लें। शुरू-शुरू में अभ्यासी इस प्राणायाम को करते वक्त सिर्फ दायीं नासिका से सांस लें और बायीं नासिका से निकाले। सांस रोकने का अभ्यास न करें। इस प्राणायाम के अभ्यास से दमा, वात, कफ रोगों का नाश होता है।

बाह्य प्राणायाम- सामान्य स्थिति में बैठकर गहरी सांस लें। अब पूरी सांस को तीन बार रोकते हुए बाहर छोड़ें। अपनी ठोडी को अपने सीने से स्पर्श करें और अपने पेट को पूरी तरह से अंदर और थोड़ा ऊपर की ओर खींच लें। अपनी क्षमता के हिसाब से इस स्थिति में बैठे रहें। फिर अपनी ठोडी धीरे से ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे में सांस लें।  फेफड़ों को पूरी तरह से हवा से भर लें। तीन बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

महाप्राण ध्वनि- हवा को संस्कृत में प्राण कहते हैं । इसी आधार पर कम हवा से उच्चरित ध्वनि अल्पप्राण और अधिक हवा से उतपन्न ध्वनि महाप्राण कही जाती है। प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण है । इसमें विसर्ग की तरह ‘ह’ की ध्वनि सुनाई पड़ती है । सभी उष्म वर्ण महाप्राण हैं। ‘हम्म्म्म’मंत्र का उच्चारण करते हुए गहरी और लंबी श्वास लें और बाहर छोड़ें। इस मंत्र का उच्चारण करते हुए दस से पंद्रह मिनट तक यह आसन करें।

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