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क्या आप जानना चाहते हैं कि रेल की पटरियों में जंग क्यों नहीं लगती तो ये खबर जरूर पढ़ें?

Written by Rohit Sharma

बचपन से लेकर अब तक कई बार रेल गाड़ी से सफ़र कर चुकेंगे. फिर भी अब तक इससे जुड़ी कई बातें नहीं जानते हैं. जैसे रेल गाड़ी के डिब्बे पर X का निशान क्यों होता है? क्या वजह है जो रेल की पटरी पर जंग नहीं लगती है? ऐसे बहुत से सवाल हैं, जिनके जवाब लोगों के पास नहीं है.

आइए पहले जानते हैं कि रेल की पटरियों में जंग क्यों नहीं लगती?

रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे ट्रैक बनाने में एक खास तरह के स्टील का इस्तेमाल किया जाता है। रेल की पटरियाँ स्टील और मैंगलॉय को मिलाकर बनाई जाती हैं। स्टील और मैंगलॉय के मिश्रण को मैंगनीज स्टील कहा जाता है। इसमें 12 प्रतिशत मैंगनीज और 1 प्रतिशत कार्बन होता है।

ऐसा माना जाता है कि स्टील में मौजूद मिश्रण की वजह से ही ट्रेन के ट्रैक का ऑक्सीकरण काफ़ी धीमी गति से होता है. इसका परिणाम ये होता है कि ट्रेन की पटरियों पर सालों-साल जंग नहीं लगती.

वहीं अगर ट्रेन के ट्रैक को आम लोहे से बनाया जाये, तो हवा और नमी के कारण उसमें जंग लग जायेगी. जंग लगने से रेल की पटरी को जल्दी-जल्दी बदलना पड़ेगा और इसमें ख़र्च भी काफ़ी है. इसी ख़र्च और समय को बचाने के लिये रेल ट्रैक बनाने के लिये स्टील, कॉर्बन और मैंगनीज़ का उपयोग होता है.

आपको बता दें कि हिंदुस्तान में ट्रेन की शुरुआत अंग्रेज़ों द्वारा की गई थी. इसलिये उस समय रेल की पटरियों को बनाने के लिये जंगविरोधी धातुओं का यूज़ किया गया. यही कारण है कि आज भी उस दौर के रेलवे ट्रैक मजबूत और जंगविरोधी बने हुए हैं. हांलाकि, हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं, जो सोचते होंगे कि पहियों के घर्षण बल के कारण जंग नहीं लगती है, पर ऐसा नहीं है.

ट्रेन के पटिरयों पर जंग क्यों नहीं लगती है, उसकी असली वजह वही है, जो हमने आपको बताई और अब आप ये जानकारी बाक़ी लोगों से भी साझा कर सकते हैं.

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