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	<title>significance of each day of chaitra navratri &#8211; Bless TV</title>
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		<title>चैत्र नवरात्रि 2023 : देवी के 9 प्रचलित नाम और उनसे जुड़ी खास बातें</title>
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		<pubDate>Thu, 23 Mar 2023 05:06:13 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>मुंबई, 24 मार्च: हिंदू धर्म में नवरात्रि का त्योहार बेहद खास होता है। चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू हो रही है। नवरात्रि में नौ दिनों तक पूजा और मंत्र जाप से मां दुर्गा विशेष रूप से प्रसन्न होती हैं। मान्यता है कि नवरात्रि में मां दुर्गा धरती पर आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा करती हैं। नवरात्रि में देवी की पूजा करने से जीवन में हर तरह की खुशियां आती हैं। देवी दुर्गा को पंच देवों में से एक माना जाता है। नवरात्रि में देवी के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।</p>
<p>नवरात्रि पर्व के दौरान सभी शक्तिपीठों में देवी के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। देवी दुर्गा को कई नामों से जाना जाता है। इनमें से कुछ नाम सबसे ज्यादा प्रचलित हैं और इन नामों के पीछे अलग-अलग कहानियां हैं। देवी दुर्गा के सबसे लोकप्रिय नाम इस प्रकार हैं &#8211; महिषासुरमर्दिनी, देवी दुर्गा, जगदंबा, विंध्यवासिनी, शेरावली मां, शाकंभरी, शैलपुत्री, भद्रकाली और चामुंडा।</p>
<p>महिषासुरमर्दिनी</p>
<p>पुराणों के अनुसार, जब राक्षस महिषासुर तीन लोगों को आतंकित कर रहा था, तब देवी दुर्गा प्रकट हुईं जब सभी देवी-देवताओं ने महिषासुर के आतंक से छुटकारा पाने और उसे मारने के लिए एक साथ प्रार्थना की। उसके बाद देवी ने 9 दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और उसका वध कर दिया। महिषासुर का वध करने के कारण इन्हें महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है।</p>
<p>देवी दुर्गा</p>
<p>ब्रह्मा के वरदान के कारण कोई भी देवता महिषासुर को नहीं मार सका, तब सभी देवताओं ने मिलकर महिषासुर को मारने के लिए देवी दुर्गा को प्रकट किया। अत्यंत कठिन परिश्रम के कारण देवी का नाम दुर्गा रखा गया। दुर्गा का अर्थ है दुर्गम जिसे जीतना कठिन हो। दुष्टों का नाश करने के कारण इनका नाम दुर्गा पड़ा।</p>
<p>जगदम्बा</p>
<p>जगदंबा देवी दुर्गा का भी एक नाम है। मां जगदंबा को संपूर्ण जगत और ब्रह्मांड की जननी माना जाता है। इस कारण उन्हें जगदंबा माता के नाम से जाना जाने लगा।</p>
<p>विन्ध्यवासिनी</p>
<p>विंध्यवासिनी मां दुर्गा का एक प्रसिद्ध नाम है। पुराणों के अनुसार विंध्याचल पर्वत पर देवी का वास माना गया है। इस कारण इन्हें विंध्यवासिनी के रूप में पूजा जाता है।</p>
<p>शेरावाली</p>
<p>शेर पर सवार होने के कारण देवी को शेरावाली भी कहा जाता है। सिंह पर सवार होकर माता ने राक्षसों का संहार किया।</p>
<p>माता शाकंभरी</p>
<p>माता का एक प्रचलित नाम शाकंभरी देवी भी है। शास्त्रों के अनुसार एक बार जब पृथ्वी पर अकाल पड़ा तो वह विपत्ति को समाप्त करने के लिए सभी पौधों और सब्जियों के साथ अवतरित हुईं। मां के इस रूप को शाकंभरी के नाम से जाना जाता है।</p>
<p>शैलपुत्री</p>
<p>चट्टान का अर्थ पहाड़ होता है। उन्हें देवी शैलपुत्री के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि पर्वतराज हिमालय की संतान हैं।</p>
<p>भद्रकाली</p>
<p>देवी दुर्गा को भद्रकाली के नाम से भी जाना जाता है। देवी काली के उग्र रूप को भद्रकाली कहा जाता है। मां के इस रूप में उनका रंग काला है।</p>
<p>चामुंडा</p>
<p>देवी ने चंड और मुंड नाम के दो राक्षसों का वध किया था, इसलिए इसका नाम चामुंडा पड़ा।</p>
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		<title>पंचक में शुरू होगी नवरात्रि, जानिए शुभ ग्रहों का योग और पंचक में योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Mar 2023 05:04:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुंबई, 20 मार्च: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। वैसे तो साल में चार नवरात्रि आते हैं, लेकिन इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्र महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस वर्ष, चैत्र नवरात्रि 22 मार्च, 2023 बुधवार से शुरू हो रही है और 30 मार्च को समाप्त हो रही है। इस बार देवी का...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई, 20 मार्च:</strong> हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। वैसे तो साल में चार नवरात्रि आते हैं, लेकिन इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्र महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस वर्ष, चैत्र नवरात्रि 22 मार्च, 2023 बुधवार से शुरू हो रही है और 30 मार्च को समाप्त हो रही है।</p>
<p>इस बार देवी का आगमन नाव से होगा। शास्त्रों में मां के इस रूप को भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करने वाला माना गया है। विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इस अवधि में घटस्थान आपके लिए बहुत ही लाभदायक और प्रगतिशील हो सकता है।</p>
<p>चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा तिथि से नव हिन्दू वर्ष की शुरुआत होती है। इस बार चैत्र नवरात्रि में नवरात्र पूरे नौ दिनों का रहेगा। नवरात्र की खास बात यह है कि नवरात्रि से एक दिन पहले पंचक लगेगा। पंचमी तिथि तक पंचमी काल में देवी की पूजा की जाएगी। पूजा के लिए पंचक काल को शुभ माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त में सुबह 6.23 से 7.32 बजे तक मंदिर में और 11.05 से 12.35 बजे तक हर घर में।</p>
<p>पंचक 19 मार्च से शुरू होकर 23 मार्च को समाप्त होता है। लेकिन इस बार पंचक के साथ ही इस दिन 4 ग्रह एक साथ मीन राशि में भ्रमण करेंगे। साथ ही गजकेसरी योग, बुद्धादित्य योग, हंस योग, शश योग, धर्मात्मा और राजलक्ष योग जैसे कई शुभ योग भी इस दिन मौजूद रहेंगे। ऐसे शुभ योगों के साथ पंचक के बारे में चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि, यह आम तौर पर स्वीकार किया जाता है कि भक्तों को भक्ति के साथ देवी की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि देवी सभी बुरे प्रभावों को दूर करने में सक्षम हैं।</p>
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