<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Shukra Pradosh Vrat 2022 &#8211; Bless TV</title>
	<atom:link href="https://blesstvlive.com/tag/shukra-pradosh-vrat-2022/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://blesstvlive.com</link>
	<description>Faith and Lifestyle channel</description>
	<lastBuildDate>Sat, 08 Oct 2022 06:57:28 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	

<image>
	<url>https://blesstvlive.com/storage/2018/04/favicon-1.png</url>
	<title>Shukra Pradosh Vrat 2022 &#8211; Bless TV</title>
	<link>https://blesstvlive.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>आज है शुक्र प्रदोष व्रत, इस समय पूजा करने से होगी परेशानियां दूर</title>
		<link>https://blesstvlive.com/today-is-shukra-pradosh-fast-worshiping-at-this-time-will-remove-problems/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Oct 2022 06:57:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Pradosh Vrat 2022]]></category>
		<category><![CDATA[Pradosh vrat benefits]]></category>
		<category><![CDATA[Pradosh Vrat for happy life]]></category>
		<category><![CDATA[Pradosh vrat in hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Pradosh Vrat pooja Vidhi]]></category>
		<category><![CDATA[Shukra Pradosh Vrat 2022]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://blesstvlive.com/?p=17083</guid>

					<description><![CDATA[प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत महीने में दो बार किया जाता है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। प्रदोष व्रत भगवान शंकर को समर्पित है। प्रदोष व्रत पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शंकर की पूजा करना बहुत...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत महीने में दो बार किया जाता है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। प्रदोष व्रत भगवान शंकर को समर्पित है। प्रदोष व्रत पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शंकर की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में प्रदोष व्रत आज यानि 7 अक्टूबर को है. प्रदोष काल में आज शिव पूजा का विशेष महत्व है। चूंकि यह व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है इसलिए इस व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत भी कहा जाता है। तो आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत पूजा अनुष्ठान और मुहूर्त।</p>
<p>शुक्र प्रदोष व्रत तिथि और मुहूर्त:<br />
हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर 2022 को प्रातः 7:26 बजे से प्रारंभ होगी। प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2022 को सुबह 5:24 बजे समाप्त होगा। तदनुसार शुक्र प्रदोष पूजा मुहूर्त 7 अक्टूबर 2022 को शाम 6:07 बजे से 8:28 बजे के बीच है।</p>
<p>यह योग एक साथ आया<br />
अश्विन शुक्र प्रदोष व्रत की पृष्ठभूमि पर आज वृद्धि और रवि योग एक साथ आ रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार वृधि योग में कोई भी शुभ कार्य करने से सफलता मिलती है। इसलिए रवियोग में पूजा करने से शक्ति और यश की प्राप्ति होती है। इसके अनुसार रवि योग 7 अक्टूबर, 2022 को शाम 6:17 बजे शुरू होगा और 8 अक्टूबर 2022 को सुबह 6:23 बजे समाप्त होगा। वृधि योग 7 अक्टूबर 2022 को रात 11:31 बजे शुरू होगा और 8 अक्टूबर 2022 को रात 8:54 बजे समाप्त होगा।</p>
<p>यह करें शुक्र प्रदोष व्रत<br />
प्रातः उठकर स्नान आदि कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें। उसके बाद भगवान शंकर के मंदिर में जाकर अभिषेक करना चाहिए और फिर शाम को शुभ मुहूर्त में घर में शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए। इस दौरान महादेव को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, अक्षत, भस्म, फूल और धोते के फल, बेला के पत्ते, भांग का भोग लगाएं। इसके साथ ही शमी के पत्ते चढ़ाकर &#8216;O नमः शिवाय&#8217; मंत्र का 11 बार जाप करें। शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती करने के बाद सात्विक भोजन के साथ व्रत का समापन करना चाहिए</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज है शुक्र प्रदोष व्रत, जानिए समय और महत्व</title>
		<link>https://blesstvlive.com/today-is-shukra-pradosh-fast-know-time-and-importance/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Sep 2022 05:32:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Pradosh Vrat 2022]]></category>
		<category><![CDATA[Pradosh vrat benefits]]></category>
		<category><![CDATA[Pradosh Vrat for happy life]]></category>
		<category><![CDATA[Pradosh Vrat pooja Vidhi]]></category>
		<category><![CDATA[Shukra Pradosh Vrat 2022]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://blesstvlive.com/?p=17020</guid>

					<description><![CDATA[हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की पूजा के लिए एकादशी का विशेष महत्व है। इसी तरह, भगवान शंकर की पूजा के लिए प्रदोष महत्वपूर्ण है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में प्रदोष व्रत आज यानी 23 सितंबर 2022 है. इसे शुक्र प्रदोष के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह प्रदोष व्रत शुक्रवार को...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की पूजा के लिए एकादशी का विशेष महत्व है। इसी तरह, भगवान शंकर की पूजा के लिए प्रदोष महत्वपूर्ण है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में प्रदोष व्रत आज यानी 23 सितंबर 2022 है. इसे शुक्र प्रदोष के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ता है। इस दिन प्रदोष व्रत के साथ विधिपूर्वक शिव पूजा करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।</p>
<p>प्रदोष व्रत तिथि और मुहूर्त:<br />
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में पंचाग प्रदोष तिथि के अनुसार 23 तारीख को दोपहर 1:17 बजे शुरू होगी. तो प्रदोष तिथि शनिवार 24 सितंबर 2022 को दोपहर 2:30 बजे समाप्त होगी। प्रदोष पूजा मुहूर्त 23 तारीख को शाम 6:23 बजे से रात 8:45 बजे तक है। इस बीच 22 सितंबर 2022 को सुबह 9:45 बजे से 23 सितंबर 2022 तक सुबह 9:56 बजे सर्वार्थ सिद्धि योग है.</p>
<p>शिव पूजा के साथ-साथ लक्ष्मी पूजा का भी महत्व<br />
शुक्र प्रदोष के दिन भगवान शंकर सहित मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शंकर का अभिषेक, रुद्राभिषेक और श्रृंग करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन भगवान शंकर को दूध से अभिषेक करना चाहिए और फूल चढ़ाना चाहिए। इससे संतान में सुख, धन के साथ-साथ करियर में सफलता मिलती है। इस प्रकार की गई पूजा भगवान शंकर को अति प्रिय मानी जाती है। भगवान शंकर की पूजा करने के बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा के दौरान देवी लक्ष्मी को लाल फूल चढ़ाएं। इसके साथ ही श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए। इससे लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और भक्तों के लिए अन्न के द्वार खोलती हैं।</p>
<p>यह करें पूजा<br />
इस दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प करें। उसके बाद भगवान शंकर के मंदिर या घर में बेलपत्र, धूप, अक्षदा, गंगाजल आदि से भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिए। इस दौरान पंचामृत से अभिषेक करने के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धोती का फूल, कन्हेर का फूल, धूप, दीपक, फल, पान आदि चढ़ाएं। पूजा के दौरान &#8216;ॐ नमः शिवाय&#8217; मंत्र का जाप करें। उसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाकर शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। अंत में भगवान शंकर की आरती करनी चाहिए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
