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	<title>Shivling &#8211; Bless TV</title>
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	<title>Shivling &#8211; Bless TV</title>
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		<title>शुरू हो रहा है श्रावण मास, शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये चीजें!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Jun 2023 08:52:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
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					<description><![CDATA[मुंबई, 26 जून: क्या आप जानते हैं कि महादेव को कभी हल्दी या तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते? इसके अलावा शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना भी वर्जित है। आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक कारण&#8230; शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाते? हिंदू धर्म में हल्दी को बहुत शुद्ध और पवित्र माना जाता...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मुंबई, 26 जून: क्या आप जानते हैं कि महादेव को कभी हल्दी या तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते? इसके अलावा शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना भी वर्जित है। आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक कारण&#8230;</p>
<p>शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाते?</p>
<p>हिंदू धर्म में हल्दी को बहुत शुद्ध और पवित्र माना जाता है। इसके बावजूद भी इसका प्रयोग शिव पूजा में नहीं किया जाता है। शास्त्र के अनुसार, शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है और हल्दी का संबंध स्त्रियों से है। यही कारण है कि भोलेनाथ को हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है। सिर्फ महाशिवरात्रि पर ही नहीं बल्कि किसी भी मौके पर भगवान शिव या फिर शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती.</p>
<p>शिवलिंग पर तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते?</p>
<p>तुलसी का जन्म पूर्व जन्म में राक्षस कुल में हुआ था। उसका नाम वृंदा था, जो भगवान विष्णु की बहुत बड़ी भक्त थी। वृंदा का विवाह राक्षस राजा जलंधर से हुआ था। जलंधर को अपनी पत्नी की भक्ति और विष्णु कवच के कारण अमरता का वरदान मिला। एक बार जब जलंधर देवताओं से युद्ध कर रहा था, तब वृंदा पूजा में बैठी और अपने पति की जीत के लिए अनुष्ठान करने लगी। भक्ति के प्रभाव से जलंधर हार नहीं रहा था। तब भगवान शिव ने उसका वध कर दिया। अपने पति की मृत्यु से वृंदा बहुत दुखी हुई और क्रोधित होकर उसने महादेव को श्राप दिया कि वह कभी भी उनकी पूजा में तुलसीदल का प्रयोग नहीं करेगी।</p>
<p>शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता</p>
<p>शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए। शंख का प्रयोग हर देवी-देवता की पूजा में किया जाता है। लेकिन महादेव की पूजा में इसका प्रयोग कभी नहीं किया जाता. शिव पुराण के अनुसार शंखचूड़ एक शक्तिशाली राक्षस था, जिसका वध स्वयं भगवान शिव ने किया था। इसीलिए महाशिवरात्रि पर कभी भी शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता।</p>
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		<title>उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर &#8211; जहाँ पर है स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी शिवलिंग</title>
		<link>https://blesstvlive.com/mahakaleshwar-temple-of-ujjain-where-is-the-self-styled-grand-and-south-facing-shivling/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhuwan Chandra]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Jan 2022 10:03:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bless]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu]]></category>
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					<description><![CDATA[महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में स्थित, महाकालेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है। स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है। इसके...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में स्थित, महाकालेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है। स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है। इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है, ऐसी मान्यता है। महाकवि कालिदास ने मेघदूत में उज्जयिनी की चर्चा करते हुए इस मंदिर की प्रशंसा की है। १२३५ ई. में इल्तुत्मिश के द्वारा इस प्राचीन मंदिर का विध्वंस किए जाने के बाद से यहां जो भी शासक रहे, उन्होंने इस मंदिर के जीर्णोद्धार और सौन्दर्यीकरण की ओर विशेष ध्यान दिया, इसीलिए मंदिर अपने वर्तमान स्वरूप को प्राप्त कर सका है। प्रतिवर्ष और सिंहस्थ के पूर्व इस मंदिर को सुसज्जित किया जाता है। मंदिर एक परकोटे के भीतर स्थित है। गर्भगृह तक पहुँचने के लिए एक सीढ़ीदार रास्ता है। इसके ठीक उपर एक दूसरा कक्ष है जिसमें ओंकारेश्वर शिवलिंग स्थापित है। मंदिर का क्षेत्रफल १०.७७ x १०.७७ वर्गमीटर और ऊंचाई २८.७१ मीटर है। महाशिवरात्रि एवं श्रावण मास में हर सोमवार को इस मंदिर में अपार भीड़ होती है। मंदिर से लगा एक छोटा-सा जलस्रोत है जिसे कोटितीर्थ कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इल्तुत्मिश ने जब मंदिर को तुड़वाया तो शिवलिंग को इसी कोटितीर्थ में फिकवा दिया था। बाद में इसकी पुनर्प्रतिष्ठा करायी गयी। सन १९६८ के सिंहस्थ महापर्व के पूर्व मुख्य द्वार का विस्तार कर सुसज्जित कर लिया गया था। इसके अलावा निकासी के लिए एक अन्य द्वार का निर्माण भी कराया गया था। लेकिन दर्शनार्थियों की अपार भीड़ को दृष्टिगत रखते हुए बिड़ला उद्योग समूह के द्वारा १९८० के सिंहस्थ के पूर्व एक विशाल सभा मंडप का निर्माण कराया। महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्था के लिए एक प्रशासनिक समिति का गठन किया गया है जिसके निर्देशन में यहाँ की व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है। हाल ही में इसके ११८ शिखरों पर १६ किलो स्वर्ण की परत चढ़ाई गई है। अब मंदिर में दान के लिए इंटरनेट सुविधा भी चालू की गई है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="" src="https://www.jansatta.com/wp-content/uploads/2020/09/Mahakaal-Mandir-Ujjain.jpg" alt="महाकाल मंदिर में भक्तों के शिवलिंग मलने पर रोक, पर सीमित मात्रा में अर्पित  कर सकेंगे शुद्ध दूध- SC का आदेश - Jansatta" width="579" height="375" /></p>
<p><img decoding="async" class="" src="https://images.hindustantimes.com/img/2021/07/27/1600x900/a047eb44-ea47-11eb-a58e-c31d3a12ae0d_1626888040030_1627362083581.jpg" alt="Stampede at Ujjain&#039;s Mahakaleshwar temple, many hurt; virus norms go for a  toss | Latest News India - Hindustan Times" width="748" height="421" /></p>
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		<title>उलटे शिवलिंग वाला दुर्लभ शिव मंदिर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:26:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bless]]></category>
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		<category><![CDATA[The Rare Shiva Temple]]></category>
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					<description><![CDATA[The Rare Shiva Temple भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर जहाँ शिवलिंग उल्टा स्थापित है। कहा जाता है कि दुनिया भर में इस मंदिर के इलावा एक ही एक और मंदिर है जहाँ शिवलिंग उल्टा स्थापित है&#124; यह दुर्लभ मंदिर स्थित है पंजाब के शहर फगवाड़ा में&#124; इसी तरह का उलटे शिवलिंग वाला दूसरा भगवान...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/pkT5SwuvNHM" frameborder="0" allow="autoplay; encrypted-media" allowfullscreen></iframe></p>
<p>The Rare Shiva Temple</p>
<p>भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर जहाँ शिवलिंग उल्टा स्थापित है। कहा  जाता है कि दुनिया भर में इस मंदिर के इलावा एक ही एक और मंदिर है जहाँ शिवलिंग उल्टा स्थापित है| </p>
<p>यह दुर्लभ मंदिर स्थित है पंजाब के शहर फगवाड़ा में| इसी तरह का उलटे शिवलिंग वाला दूसरा भगवान शिव का मन्दिर हिमाचल प्रदेश में स्थित है, महादेव कलेश्वर। </p>
<p>फगवाड़ा के इस शिव मंदिर में प्रतिदिन हजारो कि सख्या में श्रदालु भोलेनाथ कें चरणो में शीश निवानेे आते है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि लगातर 40 दिन इस मन्दिर में नमन करने से भक्तो की मनोकामनाए पूर्ण होती है।</p>
<p>इस मंदिर का इतिहास शाहूकार पोलो मल महाराज से संबंधित बताया जाता है। पांच सौ साल पुराने इस मन्दिर में भगवान शिव का जो स्वरूप प्रतिष्टि है, वह पोलो मल कि कोशिशों द्वारा स्थापित किया गया था | 15 वी शताब्दी में इस शिवलिगं को काशी और काश्मीरी पंडितो ने पूरण मर्यादा सहित स्थापित किया था| </p>
<p>कहा जाता है कि कारीगर को यह बात बताई ना गई कि शिवलिगं को किस प्रकार स्थापित करना है और कारीगर ने अपनी समझ के अनुसार शिवलिगं को उल्टा लगा दिया | पडितो के कहने पर कारीगरो को इस शिवलिगं को सीधा करने के लिए कहा गया, परन्तु वो इसे हिला भी न सके | स्थानीय भगतों के अनुसार कारीगर ने जब शिवलिंग को ठीक करने के लिए पहला प्रहार किया तो पत्थर में से पानी की धार निकली, दूसरे प्रहार से दूध की धार और तीसरे  प्रहार करने पर शिवलिगं में से खून निकलने लगा | उसी समय से यह शिवलिंग इसी स्वरूप में है।  </p>
<p>श्रद्धालुयों की मान्यता है कि जो भगत लगातार 40 दिन इस मन्दिर में माथा टेकने आते हैं, उनकी मनोकामनाएँ पूरी हो जाती हैं। </p>
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