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	<title>Shardiya Navratri 2019 &#8211; Bless TV</title>
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		<title>दो हजार साल पुरानी प्रेम कहानी से जुड़ी है मां बमलेश्वरी मंदिर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Feb 2022 08:12:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Bamleshwari Temple Dongragarh]]></category>
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		<category><![CDATA[Maa Bamleshwari mandir]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratri 2019]]></category>
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					<description><![CDATA[राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में एक पहाड़ी पर मां बम्लेश्वरी का विशाल मंदिर स्थित है। करीब दो हजार साल पहले माधवनाल और कामकंदला की प्रेम कहानी वाली कामाख्या शहर का नवरात्रि में एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है। कामकंदला और माधवनाल की प्रेम कहानी डांगरगढ़ के इतिहास में बहुत प्रसिद्ध है। लगभग ढाई...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में एक पहाड़ी पर मां बम्लेश्वरी का विशाल मंदिर स्थित है। करीब दो हजार साल पहले माधवनाल और कामकंदला की प्रेम कहानी वाली कामाख्या शहर का नवरात्रि में एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है। कामकंदला और माधवनाल की प्रेम कहानी डांगरगढ़ के इतिहास में बहुत प्रसिद्ध है। लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व कामाख्या नगर पर राजा वीरसेन का शासन था। संतान की कामना के लिए उन्होंने भगवती दुर्गा और शिव की पूजा की। आखिरकार उन्हें एक साल के भीतर ही एक बेटा रत्न मिल गया। वीरसेन ने अपने पुत्र का नाम मदनसेन रखा। मां भगवती और भगवान शिव को धन्यवाद देने के लिए राजा ने मां बम्लेश्वरी का मंदिर बनवाया। बाद में मैडसेन के पुत्र कामसेन ने गद्दी संभाली।</p>
<p>कोमसेन उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के समकालीन थे। कला, नृत्य और संगीत के लिए प्रसिद्ध कामाख्या शहर में कामकंदला नाम की एक और राज्य नर्तकी थी। प्राचीन काल में इस स्थान को कामवती नगर के नाम से जाना जाता था। माधवनाल संगीतकार थे। उनकी कला से प्रसन्न होकर राजा ने उनका हार माधवनाल को दे दिया। कामकंदला को श्रेय देते हुए माधवनाल ने उसे हरा दिया। इस पर राजा ने अपमानित महसूस किया और गुस्से में आकर माधवनाल को राज्य से बाहर निकाल दिया। इसके बावजूद कामकंदला और माधवनाल गुपचुप तरीके से मिलते रहे।</p>
<p>एक बार माधवनाल उज्जैन के राजा विक्रमादित्य की शरण में गए और उनका दिल जीत लिया और उन्हें पुरस्कार के रूप में कामकंदला को राजा कामसेन से मुक्त करने के लिए कहा। राजा विक्रमादित्य ने दोनों के बीच प्रेम की परीक्षा ली और दोनों के सच होने के बाद सबसे पहले कामकंदल की मुक्ति के लिए राजा कामसेन को संदेश भेजा। राजा के मना करने पर दोनों के बीच युद्ध छिड़ गया।</p>
<p>एक महाकाल का भक्त था तो दूसरा विमला माता का। दोनों ने अपने-अपने इष्टदेव का आह्वान किया तो एक ओर से महाकाल और दूसरी ओर भगवती विमला मां अपने-अपने भक्तों की सहायता करने पहुंच गए। युद्ध के दुष्परिणाम को देखते हुए महाकाल ने विमला माता से राजा विक्रमादित्य को क्षमा करने की प्रार्थना की और कामकंदला और माधवानल को मिलाकर वे दोनों अंतर्ध्यान हो गए।</p>
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<p><strong>ऐसे पहुंचे : </strong>राजनादगांव से 35 व राजधानी रायपुर से यह 105 किलोमीटर दूर है। हावड़ा-मुंबई रेलमार्ग से भी यह जुड़ा हुआ है। यहां रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।</p>
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