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	<title>Pradosh Vrat pooja Vidhi &#8211; Bless TV</title>
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		<title>इस शुभ योग से मेल खा रहा है शनिप्रदोष, जानिए क्या है महत्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Oct 2022 05:59:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सनातन हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शंकर को समर्पित है। इस दिन भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है। पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत महीने में दो बार किया जाता है। तदनुसार, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। आश्विन मास में...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सनातन हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शंकर को समर्पित है। इस दिन भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है। पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत महीने में दो बार किया जाता है। तदनुसार, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। आश्विन मास में प्रदोष व्रत 22 अक्टूबर शनिवार को है। मान्यता के अनुसार शनि प्रदोष व्रत करने से शनिदेव के साथ-साथ भगवान शंकर भी प्रसन्न होते हैं। यह व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए भी किया जाता है। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व, पूजा का शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े योग।</p>
<p>शनि प्रदोष व्रत तिथि<br />
पंचांग के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी तिथि शनिवार 22 अक्टूबर 2022 को सायं 06.02 बजे से प्रारंभ हो रही है। तो अगले दिन यानी 23 अक्टूबर को शाम 06:03 बजे प्रदोष तिथि समाप्त होगी. त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में शिव पूजा का विशेष महत्व है। तो शनि प्रदोष व्रत 22 अक्टूबर को मनाया जाएगा।</p>
<p>पूजा का समय<br />
प्रदोष काल में की जाने वाली शिव पूजा का विशेष महत्व है। तदनुसार 22 अक्टूबर की शाम 06.02 से 08.17 के बीच भगवान शंकर की पूजा का शुभ मुहूर्त है। शुभ मुहूर्त के अनुसार शिव पूजा की अवधि 2 घंटे 15 मिनट की होती है।</p>
<p>शुभ योग एक साथ आ रहा है&#8230;<br />
इस शनिप्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। फिलहाल दिवाली का त्योहार चल रहा है। उसमें शनिप्रदोष व्रत के दिन ब्रह्म योग शाम 05:13 बजे तक चलेगा. इसके बाद इंद्र योग शुरू होगा। इसके साथ ही इस दिन दोपहर 01:50 बजे से शाम 06:02 बजे तक त्रिपुष्कर योग होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये शुभ योग किए गए कार्यों में सफलता दिलाते हैं।</p>
<p>यह उपाय करें<br />
शनिदेव के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए शनि प्रदोष के दिन स्नान कर शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाएं। यह शनिदोष को दूर करता है, वित्तीय स्थिति में सुधार करता है और जीवन में सभी संघर्षों को दूर करता है।</p>
<p>इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या जूते का दान करें। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं और शुभ आशीर्वाद देते हैं।</p>
<p>प्रदोष काल में शिव चालीसा से भगवान शंकर का रुद्राभिषेक और शनिदेव का तेल अभिषेक और शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इससे पितृदोष दूर होता है।</p>
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		<title>आज है शुक्र प्रदोष व्रत, इस समय पूजा करने से होगी परेशानियां दूर</title>
		<link>https://blesstvlive.com/today-is-shukra-pradosh-fast-worshiping-at-this-time-will-remove-problems/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Oct 2022 06:57:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत महीने में दो बार किया जाता है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। प्रदोष व्रत भगवान शंकर को समर्पित है। प्रदोष व्रत पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शंकर की पूजा करना बहुत...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत महीने में दो बार किया जाता है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। प्रदोष व्रत भगवान शंकर को समर्पित है। प्रदोष व्रत पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शंकर की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में प्रदोष व्रत आज यानि 7 अक्टूबर को है. प्रदोष काल में आज शिव पूजा का विशेष महत्व है। चूंकि यह व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है इसलिए इस व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत भी कहा जाता है। तो आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत पूजा अनुष्ठान और मुहूर्त।</p>
<p>शुक्र प्रदोष व्रत तिथि और मुहूर्त:<br />
हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर 2022 को प्रातः 7:26 बजे से प्रारंभ होगी। प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2022 को सुबह 5:24 बजे समाप्त होगा। तदनुसार शुक्र प्रदोष पूजा मुहूर्त 7 अक्टूबर 2022 को शाम 6:07 बजे से 8:28 बजे के बीच है।</p>
<p>यह योग एक साथ आया<br />
अश्विन शुक्र प्रदोष व्रत की पृष्ठभूमि पर आज वृद्धि और रवि योग एक साथ आ रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार वृधि योग में कोई भी शुभ कार्य करने से सफलता मिलती है। इसलिए रवियोग में पूजा करने से शक्ति और यश की प्राप्ति होती है। इसके अनुसार रवि योग 7 अक्टूबर, 2022 को शाम 6:17 बजे शुरू होगा और 8 अक्टूबर 2022 को सुबह 6:23 बजे समाप्त होगा। वृधि योग 7 अक्टूबर 2022 को रात 11:31 बजे शुरू होगा और 8 अक्टूबर 2022 को रात 8:54 बजे समाप्त होगा।</p>
<p>यह करें शुक्र प्रदोष व्रत<br />
प्रातः उठकर स्नान आदि कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें। उसके बाद भगवान शंकर के मंदिर में जाकर अभिषेक करना चाहिए और फिर शाम को शुभ मुहूर्त में घर में शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए। इस दौरान महादेव को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, अक्षत, भस्म, फूल और धोते के फल, बेला के पत्ते, भांग का भोग लगाएं। इसके साथ ही शमी के पत्ते चढ़ाकर &#8216;O नमः शिवाय&#8217; मंत्र का 11 बार जाप करें। शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती करने के बाद सात्विक भोजन के साथ व्रत का समापन करना चाहिए</p>
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		<title>आज है शुक्र प्रदोष व्रत, जानिए समय और महत्व</title>
		<link>https://blesstvlive.com/today-is-shukra-pradosh-fast-know-time-and-importance/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Sep 2022 05:32:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की पूजा के लिए एकादशी का विशेष महत्व है। इसी तरह, भगवान शंकर की पूजा के लिए प्रदोष महत्वपूर्ण है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में प्रदोष व्रत आज यानी 23 सितंबर 2022 है. इसे शुक्र प्रदोष के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह प्रदोष व्रत शुक्रवार को...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की पूजा के लिए एकादशी का विशेष महत्व है। इसी तरह, भगवान शंकर की पूजा के लिए प्रदोष महत्वपूर्ण है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में प्रदोष व्रत आज यानी 23 सितंबर 2022 है. इसे शुक्र प्रदोष के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ता है। इस दिन प्रदोष व्रत के साथ विधिपूर्वक शिव पूजा करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।</p>
<p>प्रदोष व्रत तिथि और मुहूर्त:<br />
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में पंचाग प्रदोष तिथि के अनुसार 23 तारीख को दोपहर 1:17 बजे शुरू होगी. तो प्रदोष तिथि शनिवार 24 सितंबर 2022 को दोपहर 2:30 बजे समाप्त होगी। प्रदोष पूजा मुहूर्त 23 तारीख को शाम 6:23 बजे से रात 8:45 बजे तक है। इस बीच 22 सितंबर 2022 को सुबह 9:45 बजे से 23 सितंबर 2022 तक सुबह 9:56 बजे सर्वार्थ सिद्धि योग है.</p>
<p>शिव पूजा के साथ-साथ लक्ष्मी पूजा का भी महत्व<br />
शुक्र प्रदोष के दिन भगवान शंकर सहित मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शंकर का अभिषेक, रुद्राभिषेक और श्रृंग करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन भगवान शंकर को दूध से अभिषेक करना चाहिए और फूल चढ़ाना चाहिए। इससे संतान में सुख, धन के साथ-साथ करियर में सफलता मिलती है। इस प्रकार की गई पूजा भगवान शंकर को अति प्रिय मानी जाती है। भगवान शंकर की पूजा करने के बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा के दौरान देवी लक्ष्मी को लाल फूल चढ़ाएं। इसके साथ ही श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए। इससे लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और भक्तों के लिए अन्न के द्वार खोलती हैं।</p>
<p>यह करें पूजा<br />
इस दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प करें। उसके बाद भगवान शंकर के मंदिर या घर में बेलपत्र, धूप, अक्षदा, गंगाजल आदि से भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिए। इस दौरान पंचामृत से अभिषेक करने के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धोती का फूल, कन्हेर का फूल, धूप, दीपक, फल, पान आदि चढ़ाएं। पूजा के दौरान &#8216;ॐ नमः शिवाय&#8217; मंत्र का जाप करें। उसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाकर शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। अंत में भगवान शंकर की आरती करनी चाहिए।</p>
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		<title>बुधवार को है श्रावण मास का दूसरा प्रदोष व्रत, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व</title>
		<link>https://blesstvlive.com/wednesday-is-the-second-pradosh-fast-of-shravan-month-know-the-auspicious-time-and-importance-of-worship/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Aug 2022 06:15:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
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		<category><![CDATA[Budh Pradosh Vrat 2022]]></category>
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		<category><![CDATA[Shrawan Pradosh Vrat]]></category>
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					<description><![CDATA[इस समय श्रावण का महीना शुरू हो रहा है। यह महीना भगवान शंकर को समर्पित है और भक्त इस महीने में शिव की विधिवत पूजा करते हैं। जिस प्रकार श्रावण सोमवार भगवान शंकर की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है। उनकी तरह प्रदोष व्रत भी विशेष माना जाता है। शिव भक्तों के लिए इस महीने में...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इस समय श्रावण का महीना शुरू हो रहा है। यह महीना भगवान शंकर को समर्पित है और भक्त इस महीने में शिव की विधिवत पूजा करते हैं। जिस प्रकार श्रावण सोमवार भगवान शंकर की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है। उनकी तरह प्रदोष व्रत भी विशेष माना जाता है। शिव भक्तों के लिए इस महीने में एक बड़ा योग मैच है। बुधवार यानि 24 जून को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में प्रदोष व्रत है. चूंकि यह व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत भी कहा जाता है।</p>
<p>जानिए तिथि और मुहूर्त<br />
पंचांग के अनुसार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में बुध प्रदोष 24 अगस्त को सुबह 8:30 बजे से शुरू हो रहा है. इसका समापन 25 अगस्त को सुबह 10:37 बजे होगा। प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय ही की जाती है। इस दिन पूजा करने से व्यक्ति भगवान शिव को प्रसन्न कर अपनी मनोकामना पूरी कर सकता है।</p>
<p>यही महत्व है<br />
धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत के पालन से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से संतान को भी लाभ होता है। इस व्रत को करने से भगवान शंकर और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।</p>
<p>ऐसा है प्रदोष व्रत का विधान<br />
बुध प्रदोष के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। उसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और पूजा स्थल को गंगा जल से शुद्ध करें। बेलपत्र, अक्षदा, दीप, धूप, गंगाजल आदि भगवान शंकर की पूजा करते हुए &#8216;O नमः शिवाय&#8217; मंत्र का जाप करते हुए भगवान शंकर को जल अर्पित करें। भगवान शंकर दिन में शाम को कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं। इसलिए शाम को शिव मंदिर जाकर शिव पूजा करनी चाहिए और मंत्र का जाप करना चाहिए।</p>
<p>दिन के हिसाब से प्रदोष व्रत का महत्व<br />
रवि प्रदोष व्रत &#8211; यह व्रत लंबी आयु और अच्छा स्वास्थ्य देता है।<br />
सोम प्रदोष व्रत &#8211; सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।<br />
भौम प्रदोष व्रत- असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।<br />
बुध प्रदोष व्रत- इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साथ ही बच्चा खुश होता है।<br />
गुरु प्रदोष व्रत &#8211; शत्रुओं को परास्त करने के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण है।<br />
शुक्र प्रदोष व्रत &#8211; सुख, समृद्धि और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करें यह व्रत।<br />
शनि प्रदोष व्रत – पुराणों के अनुसार आमतौर पर यह माना जाता है कि यह व्रत पुत्र की प्राप्ति के लिए किया जाता है।</p>
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