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	<title>Navratri 2022 &#8211; Bless TV</title>
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	<title>Navratri 2022 &#8211; Bless TV</title>
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		<title>महानवमी के दिन होती है माता सिद्धिदात्री की पूजा, यहां देखें शुभ मुहूर्त और पूजा अनुष्ठान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Oct 2022 05:45:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नवरात्रि का समापन महानवमी के साथ होता है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। कमल पर विराजमान माता सिद्धिदात्री अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। महानवमी का दिन बहुत खास होता है। इस दिन देवी की कृपा पाने के लिए कन्या पूजन करना चाहिए। छोटी लड़कियों को...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नवरात्रि का समापन महानवमी के साथ होता है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। कमल पर विराजमान माता सिद्धिदात्री अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। महानवमी का दिन बहुत खास होता है। इस दिन देवी की कृपा पाने के लिए कन्या पूजन करना चाहिए। छोटी लड़कियों को देवी माना जाता है। इसलिए इनकी पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा नवमी के दिन हवन करना भी शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं महानवमी पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा अनुष्ठान</p>
<p>महानवमी शुभ क्षण<br />
महानवमी 3 अक्टूबर को शाम 4:37 बजे शुरू हुई और आज 4 अक्टूबर को दोपहर 2:20 बजे समाप्त होगी। उदयतिथि के अनुसार 4 अक्टूबर यानि आज महानवमी व्रत और पूजा होगी. इस दिन कन्या पूजा का विशेष महत्व होता है और कहा जाता है कि छोटी कन्याओं की पूजा करने से देवी प्रसन्न होती हैं। इस दिन 2 से 9 साल की उम्र की लड़कियों को भोजन दान करना शुभ माना जाता है।</p>
<p>महानवमी पूजा अनुष्ठान<br />
महानवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लेना चाहिए और साफ कपड़े पहनकर मंदिर की सफाई करनी चाहिए। इसके बाद मां सिद्धिदात्री की पूजा करनी चाहिए। आरती और मंत्रों का जाप भी करना चाहिए। मंदिर में देवी की छवि के सामने घी का दीपक जलाएं और देवी को सिंदूर लगाएं। इसके बाद देवी को फल, मिठाई, फूल आदि चढ़ाएं और देवी के मंदिर में बैठकर आरती और मंत्रों का जाप करें और ध्यान करें। ऐसा माना जाता है कि इससे देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके बाद कन्या पूजन करें।</p>
<p>यो बातों का ध्यान रखें<br />
कन्या पूजन केवल 2 से 9 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए ही किया जाना चाहिए। पूजा के लिए 9 कन्याओं की आवश्यकता होती है और एक लड़के को लंगूर भी कहा जाता है। यदि कन्या पूजा के लिए 9 कन्याएं नहीं मिलती हैं तो 7 कन्याओं को कन्या पूजन भी किया जा सकता है। कन्या पूजन करते समय कन्याओं को आसन पर बैठाकर उनके पैर धोकर तिलक लगाना चाहिए। फिर उन्हें खीर, पूरी और चना खिलाएं। इसके बाद दक्षिणा दें और उन्हें विदा करें।</p>
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		<title>दुर्गा अष्टमी पर करें ये काम, प्रसन्न होंगी मां दुर्गा, सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी</title>
		<link>https://blesstvlive.com/do-this-work-on-durga-ashtami-mother-durga-will-be-pleased-all-wishes-will-be-fulfilled/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Oct 2022 05:14:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शारदीय नवरात्रि महोत्सव पूरे देश में  उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आज (3 अक्टूबर) नवरात्रि का आठवां दिन यानि दुर्गा अष्टमी है। दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। जिन घरों में अष्टमी की पूजा होती है, वहां दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन के साथ व्रत तोड़ा...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शारदीय नवरात्रि महोत्सव पूरे देश में  उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आज (3 अक्टूबर) नवरात्रि का आठवां दिन यानि दुर्गा अष्टमी है। दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। जिन घरों में अष्टमी की पूजा होती है, वहां दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन के साथ व्रत तोड़ा जाता है। माना जाता है कि अष्टमी पूजा के बाद कन्या की पूजा करने से देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धार्मिक दृष्टि से दुर्गा अष्टमी का दिन बहुत ही शुभ होता है। इस दिन कुछ काम करने से देवी प्रसन्न होती हैं।</p>
<p>दुर्गाष्टमी पर करें ये उपाय<br />
हवन : दुर्गा अष्टमी के दिन हवन करना शुभ माना जाता है। हवन करने से देवी दुर्गा प्रसन्न होती हैं और घर का वातावरण भी शुद्ध होता है। ऐसा माना जाता है कि यज्ञ करने से घर से सारी नकारात्मकता दूर हो जाती है। यह भी धार्मिक रूप से माना जाता है कि हवन करने से देवी दुर्गा की कृपा मिलती है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हवन करने से दुर्गाष्टमी का व्रत पूर्ण माना जाता है।</p>
<p>कन्या पूजन: छोटी कन्याओं को देवी का प्रतीक माना जाता है। इसलिए नवरात्रि पर्व में कन्या पूजन का बहुत महत्व है। कन्या पूजन के साथ पूजा संपन्न होती है। दुर्गा अष्टमी के दिन 9 कन्याओं की पूजा कर उन्हें भोजन कराना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।</p>
<p>लाल चुनरी : देवी दुर्गा की कृपा पाने के लिए दुर्गा अष्टमी के दिन देवी की पूजा करनी चाहिए और पूजा में देवी को लाल चुनरी अर्पित करनी चाहिए. पूजा के बाद देवी की आरती करवाएं और मंत्रों का जाप भी करें। देवी को लाल चुनरी चढ़ाते समय उसके साथ 5 प्रकार के मेवे भी चढ़ाने चाहिए।</p>
<p>श्रृंगार सामग्री: दुर्गा अष्टमी पर विवाहित महिलाओं को देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए श्रृंगार सामग्री चढ़ानी चाहिए। इन प्रसाद में चांदी के जोडवे, कुंकू, सिंदूर, पैजान, चांदी के सिक्के और चूड़ियां आदि शामिल होने चाहिए।</p>
<p>बट्टाशा प्रसाद: दुर्गाष्टमी के दिन देवी को प्रसन्न करने के लिए पूजा में बत्तशा का भोग लगाना चाहिए। साथ ही देवी को मालपुआ और खीर का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। इससे भक्तों का भला होता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।</p>
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		<title>शत्रु से मुक्ति के लिए सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानिए पूजा की विधि, मंत्र और व्रत कथा</title>
		<link>https://blesstvlive.com/worship-maa-kalratri-on-the-seventh-day-to-get-rid-of-the-enemy-know-the-method-of-worship/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 Oct 2022 06:03:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नवरात्रि का त्योहार पूरे देश में उत्सव और भक्ति के माहौल में मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। नवरात्रि उत्सव के दौरान हर दिन देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इस अवधि के दौरान भक्त देवी को प्रसन्न करने के लिए 9 दिनों तक...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नवरात्रि का त्योहार पूरे देश में उत्सव और भक्ति के माहौल में मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। नवरात्रि उत्सव के दौरान हर दिन देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इस अवधि के दौरान भक्त देवी को प्रसन्न करने के लिए 9 दिनों तक उपवास करते हैं। आज (2 अक्टूबर) नवरात्रि की सातवीं माला है। नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। यह एक धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी कालरात्रि की पूजा करने से जीवन में सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। आज हम जानेंगे कि देवी कालरात्रि की पूजा कैसे करें, क्या है कथा और देवी को प्रसन्न करने के लिए कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए।</p>
<p>मां कालरात्रि की पूजा की विधि<br />
नवरात्रि के सातवें दिन स्नान आदि के बाद देवी कालरात्रि का स्मरण करना चाहिए। इसके बाद देवी की मूर्ति या छवि की पूजा करनी चाहिए और भक्ति के साथ देवी को अक्षत, धूप, सुगंधित फूल और गुड़ आदि का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। देवी कालरात्रि को रात्राणी का फूल बहुत प्रिय होता है। इसलिए इन फूलों को देवी की पूजा करते समय अर्पित करना चाहिए। इसके बाद मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करना चाहिए। अंत में देवी कालरात्रि की आरती करें और पूरे दिन नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें।</p>
<p>देवी कालरात्रि का मंत्र<br />
‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:.’</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>देवी कालरात्रि की कहानी क्या है?<br />
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कालरात्रि देवी दुर्गा के 9 रूपों में से एक हैं। देवी कालरात्रि का रंग काला है और इसी रंग के कारण ही देवी के इस रूप का नाम कालरात्रि पड़ा। चतुर्भुज देवी कालरात्रि के दोनों बाएं हाथों में क्रमशः एक खंजर और एक लोहे का कांटा है। माना जाता है कि देवी कालरात्रि को देवी दुर्गा ने असुरों के राजा रक्तबीज को मारने के लिए अपनी प्रतिभा से बनाया था।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नवरात्रि के नौ दिनों तक पहनें ये रंग के कपड़े, मिलेगी मां दुर्गा की कृपा</title>
		<link>https://blesstvlive.com/wear-these-colored-clothes-for-nine-days-of-navratri-you-will-get-the-grace-of-maa-durga/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 05:59:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Navratri 2022 Colors: आज से नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो रही है. नवरात्रि के नौ दिनों में नौ अलग-अलग रंग के कपड़े पहने जाते हैं। यह एक धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान हर दिन कुछ रंग के कपड़े पहनने से देवी दुर्गा प्रसन्न और धन्य होती हैं। दरअसल देवी के विभिन्न रूपों को...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>Navratri 2022 Colors: आज से नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो रही है. नवरात्रि के नौ दिनों में नौ अलग-अलग रंग के कपड़े पहने जाते हैं। यह एक धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान हर दिन कुछ रंग के कपड़े पहनने से देवी दुर्गा प्रसन्न और धन्य होती हैं। दरअसल देवी के विभिन्न रूपों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग रंग के कपड़े पहने जाते हैं। सभी रंगों का अपना-अपना महत्व है और नवरात्रि पर्व के दौरान नौ दिनों तक इन्हें पहनना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं नौ दिनों के दौरान नवरात्रि पर्व के दौरान किस दिन कौन से रंग के कपड़े पहनने चाहिए।</p>
<p>नवरात्रि में किस दिन कौन से रंग के कपड़े पहनने चाहिए?<br />
पहला दिन-पीला रंग: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माना जाता है कि माता शैलपुत्री को पीला रंग बेहद पसंद है। इसलिए इस दिन पीले वस्त्र पहनकर देवी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से देवी प्रसन्न होती हैं।</p>
<p>दूसरा दिन- हरा रंग: नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। ब्रह्मचारी माता को हरा रंग बहुत प्रिय माना गया है। इसलिए इस दिन देवी को हरी चुनरी और हरे आभूषण चढ़ाए जाते हैं। इस दिन हरे वस्त्र पहनकर देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है।</p>
<p>तीसरा दिन-भूरा रंग: नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा देवी के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भूरे रंग के कपड़े पहनकर देवी की पूजा करने से देवी प्रसन्न होती हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।</p>
<p>चौथा दिन-नारंगी रंग : नवरात्रि के चौथे दिन कुष्मांडा माता की पूजा की जाती है। माना जाता है कि देवी कुष्मांडा को नारंगी रंग बहुत पसंद है। इसलिए इस दिन नारंगी रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।</p>
<p>पांचवां दिन- सफेद रंग: देवी स्कंदमाते को सफेद रंग पसंद है। नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इसलिए भक्तों को पूजा करते समय सफेद वस्त्र धारण करना चाहिए।</p>
<p>छठा दिन- लाल रंग: नवरात्रि के छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा करने का रिवाज है। लाल रंग देवी कात्यायनी को बहुत प्रिय है। इसलिए इस दिन देवी की पूजा करते समय लाल वस्त्र अर्पित करने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे देवी प्रसन्न होती हैं।</p>
<p>सातवां दिन- नीला रंग: नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। माना जाता है कि मां कालरात्रि को नीला रंग पसंद है। इस दिन देवी को नीले वस्त्र चढ़ाए जाते हैं और पूजा में अन्य वस्तुओं को भी नीले रंग में रखा जाता है। इस दिन नीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।</p>
<p>आठवां दिन- गुलाबी रंग: नवरात्रि के आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा गुलाबी वस्त्र पहनकर की जाती है। महागौरी माता को गुलाबी रंग बहुत प्रिय माना जाता है। इसलिए इस दिन देवी को प्रसन्न करने के लिए गुलाबी वस्त्र धारण करना चाहिए।</p>
<p>नौवां दिन- बैंगनी रंग: नौवां दिन इस पर्व का अंतिम दिन होता है। इस दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा करने की प्रथा है। देवी सिद्धिदात्री का रंग बहुत बैंगनी है और इस दिन देवी की पूजा बैंगनी रंग के कपड़े पहनकर की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे देवी प्रसन्न होती हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>इस नवरात्रि में अपने परिवार के साथ लें माता वैष्णो देवी के दर्शन, भारतीय रेलवे दे रहा है शानदार पैकेज</title>
		<link>https://blesstvlive.com/take-darshan-of-mata-vaishno-devi-with-your-family-this-navratri/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Sep 2022 05:25:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Navratri 2022: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 26 सितंबर से शुरू हो रहा है. इस दौरान हजारों भक्त माता वैष्णोदेवी के दर्शन करने वैष्णोदेवी जाते हैं और माता वैष्णोदेवी का आशीर्वाद लेते हैं। अगर आप भी नवरात्रि के दौरान वैष्णोदेवी घूमने का प्लान कर रहे हैं तो आईआरसीटीसी द्वारा जारी किए गए इस खास टूर...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>Navratri 2022: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 26 सितंबर से शुरू हो रहा है. इस दौरान हजारों भक्त माता वैष्णोदेवी के दर्शन करने वैष्णोदेवी जाते हैं और माता वैष्णोदेवी का आशीर्वाद लेते हैं। अगर आप भी नवरात्रि के दौरान वैष्णोदेवी घूमने का प्लान कर रहे हैं तो आईआरसीटीसी द्वारा जारी किए गए इस खास टूर पैकेज के बारे में जरूर जान लें। आईआरसीटीसी के इस टूर 1 पैकेज के तहत आप कम बजट में पूरे परिवार के साथ वैष्णोदेवी की यात्रा कर सकते हैं। आइए जानते हैं आईआरसीटीसी के इस पैकेज में विस्तार से जानकारी।</p>
<p>ऐसे शुरू होगा सफर<br />
वैष्णो देवी मंदिर की यह यात्रा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से शुरू होगी। यहां ट्रेन संख्या 22461 श्री शक्ति एक्सप्रेस नई दिल्ली से कटरा के लिए प्रस्थान करेगी। रात भर की यात्रा के बाद यात्री अगले दिन कटरा स्टेशन पहुंचेंगे, इस दौरान उन्हें एसी डॉरमेट्री में नहाने का पूरा समय दिया जाएगा। उसके बाद गेस्ट हाउस में यात्रियों के लिए जलपान की व्यवस्था की जाएगी और उन्हें बाण गंगा में उतारा जाएगा। वहां से यात्रियों को माता वैष्णो देवी की यात्रा खुद तय करनी होती है। यात्रा के अंत में यात्रियों को बाण गंगा से गेस्ट हाउस ले जाया जाएगा, वहां आराम करने के बाद यात्रियों को कटरा से दिल्ली स्थानांतरित किया जाएगा।</p>
<p>इन सुविधाओं से होगा फायदा<br />
आईआरसीटीसी के इस पैकेज के तहत यात्रियों को 3 एसी में यात्रा करने के साथ-साथ कटरा के गेस्ट हाउस में नहाने और तैयार होने की सुविधा प्रदान की जाएगी। इस दौरान यात्रियों के लिए नाश्ते की व्यवस्था की जाएगी और सामान रखने के लिए लॉकर की भी व्यवस्था की जाएगी। यात्रियों को बाण गंगा ले जाने और वहां से वापस गेस्ट हाउस लाने की पूरी व्यवस्था की जाएगी। आईआरसीटीसी के इस पैकेज का लाभ उठाने के लिए आपको केवल 3515 रुपये का भुगतान करना होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>इस शुभ मुहूर्त में करें रामनवमी की पूजा, जानिए अनुष्ठान और महत्व</title>
		<link>https://blesstvlive.com/worship-ram-navami-in-this-auspicious-time-know-the-rituals-and-importance/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Apr 2022 06:20:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। रामनवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ भगवान राम की भी पूजा की जाती है। राम नवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने दशरथ...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। रामनवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ भगवान राम की भी पूजा की जाती है। राम नवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने दशरथ की सबसे बड़ी पत्नी कौशल्या के गर्भ से सातवां अवतार लिया था। यही कारण है कि राम नवमी श्री राम के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। लेकिन भगवान राम के जन्म के साथ ही उनके तीन भाइयों लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भरत का भी जन्म इसी दिन माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं राम नवमी का शुभ मुहूर्त और महत्व</p>
<p>राम नवमी का शुभ मुहूर्त<br />
चैत्र शुक्ल नवमी तिथि प्रारंभ &#8211; 10 अप्रैल, रविवार पूर्वाह्न 01:23 बजे<br />
चैत्र शुक्ल नवमी तिथि समाप्ति &#8211; सोमवार 11 अप्रैल, 03:15 पूर्वाह्न<br />
रामजन्मोत्सव शुभ मुहूर्त &#8211; प्रातः 11:06 से दोपहर 1:39 तक।<br />
रामनवमी के दिन सुकर्म योग &#8211; दोपहर 12:04 बजे तक<br />
रामनवमी के दिन पुष्य नक्षत्र पूरी रात तक रहता है।<br />
रामनवमी को विजय क्षण &#8211; दोपहर 02:30 बजे से 03:21 बजे तक<br />
राम नवमी पर अमृत काल &#8211; रात 11:50 बजे से दोपहर 01:35 बजे तक<br />
रामनवमी पर रहें &#8211; शाम 05:09 बजे से शाम 06:44 बजे तक</p>
<p>राम नवमी की पूजा अनुष्ठान<br />
रामनवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और नाग के वस्त्र धारण करना चाहिए। फिर चावल को हाथ में लेकर व्रत करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर भगवान राम की पूजा करें और गंगाजल, फूल, माला, 5 प्रकार के फल, मिठाई आदि चढ़ाएं। अब भगवान राम को तुलसी के पत्ते और कमल के फूल चढ़ाएं। फिर रामचरितमानस, रामायण या रामरक्षस्तोत्र का पाठ करें।</p>
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		<title>श्रीराम नवमी कब है? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा-अर्चना</title>
		<link>https://blesstvlive.com/when-is-shri-ram-navami-know-auspicious-time-importance-and-worship/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Apr 2022 11:15:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratra 2022]]></category>
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		<category><![CDATA[last day of Chaitra Navratra]]></category>
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		<category><![CDATA[Ram Navami]]></category>
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		<category><![CDATA[Ram Navami 2022 Shubh Muhurta]]></category>
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		<category><![CDATA[Significance of Ram Navami 2022]]></category>
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					<description><![CDATA[चैत्र के महीने में नवरात्रि बहुत ही खास होती है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। नवरात्र के नौ दिनों के दौरान, दुर्गा पूजा के 9 अलग-अलग रूपों का प्रदर्शन किया जाता है। नवरात्रि में भक्तों में उत्साह का माहौल रहता है। साथ ही नवरात्रि के अंतिम दिन श्री रामनवमी भी मनाई...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>चैत्र के महीने में नवरात्रि बहुत ही खास होती है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। नवरात्र के नौ दिनों के दौरान, दुर्गा पूजा के 9 अलग-अलग रूपों का प्रदर्शन किया जाता है। नवरात्रि में भक्तों में उत्साह का माहौल रहता है। साथ ही नवरात्रि के अंतिम दिन श्री रामनवमी भी मनाई जाती है। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को नवरात्रि का अंतिम दिन होता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम का जन्म हुआ था। इसलिए इस तिथि को रामनवमी कहते हैं। रामनवमी पूरे देश में बहुत उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस दिन भगवान राम और सीता माता की पूजा की जाती है।</p>
<p>राम नवमी शुभ मुहूर्त<br />
राम नवमी तिथि &#8211; 10 अप्रैल 2022 (रविवार)<br />
राम नवमी तिथि प्रारंभ &#8211; 10 अप्रैल 2022, दोपहर 1:32 बजे<br />
रामनवमी तिथि की समाप्ति &#8211; 11 अप्रैल 2022, प्रातः 03:15 बजे तक<br />
राम नवमी पूजा मुहूर्त &#8211; 10 अप्रैल 2022, सुबह 11:10 बजे से दोपहर 1:32 बजे तक।</p>
<p>राम नवमी पूजा विधि<br />
रामनवमी के दिन प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर कर्मकांड पूर्ण कर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद भगवान श्रीराम, भाई लक्ष्मण और माता सीता की पूजा करनी चाहिए। फिर घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। उसके बाद प्रभु श्री रामचरित मानस, रामरक्षा स्तोत्र या रामायण का पाठ करना चाहिए। फिर आरती करें और भगवान के सामने प्रसाद चढ़ाकर उसका वितरण करें।</p>
<p>राम नवमी 2022 का महत्व<br />
शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीराम चौदह वर्ष वनवास में रहे थे। इस अवधि के दौरान उन्होंने लंकाधीश रावण का वध किया और धर्म की स्थापना की। ऐसा माना जाता है कि दिन में उपवास करने से जीवन में हर तरह की सुख-समृद्धि आती है। माना जाता है कि भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था। अयोध्या में भगवान राम की जन्मस्थली पर भी भव्य मंदिर बनाया जा रहा है।</p>
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		<title>नवरात्रि के पांचवें दिन की जाती है स्कंदमाता की पूजा, जानें पूजा अनुष्ठान, मंत्र और व्रत कथा</title>
		<link>https://blesstvlive.com/skandmata-is-worshiped-on-the-fifth-day-of-navratri-know-worship-rituals-mantras-and-fast-story/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Apr 2022 06:14:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2022]]></category>
		<category><![CDATA[fifth day of Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri 2022]]></category>
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					<description><![CDATA[नवरात्रि का पांचवां दिन स्कंदमाता को समर्पित है। इस दिन विधि विधान से स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता को देवी पार्वती का दूसरा रूप माना जाता है। उनके पुत्र का नाम स्कंद कुमार होने के कारण उनका नाम स्कंदमाता था। शास्त्रों के अनुसार स्कंदमाता नकारात्मक शक्तियों का नाश कर जीवन में सुख-समृद्धि लाती...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नवरात्रि का पांचवां दिन स्कंदमाता को समर्पित है। इस दिन विधि विधान से स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता को देवी पार्वती का दूसरा रूप माना जाता है। उनके पुत्र का नाम स्कंद कुमार होने के कारण उनका नाम स्कंदमाता था। शास्त्रों के अनुसार स्कंदमाता नकारात्मक शक्तियों का नाश कर जीवन में सुख-समृद्धि लाती है। इसलिए नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंद माता की पूजा-अर्चना, मंत्री और व्रत कथाएं करें।</p>
<p>शुभ क्षण<br />
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:34 बजे से शाम 5:20 बजे तक।<br />
शामविजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:20 बजे तक।<br />
गोरज मुहूर्त: शाम 6:29 से 6:53 बजे तक।<br />
अमृत ​​समय: शाम 4:06 से 5:53 बजे तक।<br />
सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरा दिन<br />
रवि योग: 7 अप्रैल को शाम 7:40 से 7:05 बजे तक</p>
<p>स्कंदमाता के पूजा अनुष्ठान और मंत्र<br />
सबसे पहले उठो और दिव्य क्षण में स्नान करो। फिर पीले वस्त्र धारण करें और स्कंदमाता की मूर्ति या प्रतिमा के सामने बैठ जाएं। देवी को पीले फूल और माला अर्पित करें। देवी की मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद मंत्र जाप कर देवी की आरती करनी चाहिए।</p>
<p>मंत्र:<br />
या देवी सर्वभूतेशु मातृरूपेना संस्था। नमस्तसयै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नामा।</p>
<p>सिंहसनगता नित्यम पद्मश्रितकारद्वय शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।</p>
<p>स्कंदमाता की आरती<br />
जय तेरी हो स्कंद माता,<br />
पाँचवाँ नाम तुम्हारा है।<br />
सबका मन हार रहा है,<br />
जग जननी सब की महतारी।<br />
मैं तेरी लौ जलाता रहूंगा,<br />
मैं तुम्हें हमेशा याद रखूंगा।<br />
मैंने तुम्हें कई नामों से पुकारा,<br />
मुझे आपका समर्थन है।<br />
पहाड़ों पर कहीं डेरा है,<br />
कई शहरों में आपका ठिकाना।<br />
हर एक मन्दिर में तेरे दर्शन का भजन गाओ,<br />
आपका भक्त प्रिय भक्ति।<br />
मुझे अपनी ताकत दो,<br />
मुझे और खराब कर दो<br />
इंदर आदि देवता मिल सारे,<br />
आप के माध्यम से कॉल करें।<br />
दुष्&#x200d;ट दत्&#x200d;या जब छड कर आए,<br />
तुम तलवार उठाओ।<br />
गुलाम को हमेशा के लिए बचाने आया था,<br />
चमन की आराधना पर आ गई।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>नवरात्रि के चौथे दिन करें ये काम, करें माता कुष्मांडा की पूजा, जानें मंत्र और आरती</title>
		<link>https://blesstvlive.com/do-this-work-on-the-fourth-day-of-navratri-worship-mata-kushmanda-know-the-mantra-and-aarti/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Apr 2022 06:15:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Adishakti]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2022]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2022 Day 4]]></category>
		<category><![CDATA[fourth day of Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Goddess Durga]]></category>
		<category><![CDATA[Goddess Kushmanda]]></category>
		<category><![CDATA[Kushmanda mata]]></category>
		<category><![CDATA[Kushmanda Mata Ariti]]></category>
		<category><![CDATA[Kushmanda Mata Mantra]]></category>
		<category><![CDATA[Kushmanda mata Naivadya]]></category>
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					<description><![CDATA[नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। यह देवी दुर्गा का चौथा रूप माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी कुष्मांडा ने इस ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें आदिशक्ति भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि शुरू में हर जगह अंधेरा था और फिर देवी ने...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। यह देवी दुर्गा का चौथा रूप माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी कुष्मांडा ने इस ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें आदिशक्ति भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि शुरू में हर जगह अंधेरा था और फिर देवी ने अपनी मुस्कान से इस दुनिया की रचना की। अष्टकोणीय देवी कुष्मांडा के पास धनुष, बाण, कमल का फूल, मंडला, माला, चक्र, गदा और अमृत से भरा कलश है। नवरात्रि के चौदहवें दिन, देवी कुष्मांडा की औपचारिक रूप से पूजा की जाती है और आरती की जाती है। देवी की कथा सुनाकर नैवेद्य भी चढ़ाया जाता है। आइए जानते हैं मां कूष्मांडा की पूजा विधि और मंत्रों के बारे में&#8230;</p>
<p>पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी कुष्मांडा ने दुनिया को राक्षसों के अत्याचार से मुक्त करने के लिए अवतार लिया था। देवी कुष्मांडा ने सृष्टि की रचना की। इसलिए उन्हें आदिस्वरूप और आदिशक्ति भी कहा जाता है। सिंह देवी का वाहन है। ऐसा माना जाता है कि देवी का वास सौरमंडल के आंतरिक जगत में है। नवरात्रि के चौथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन, यश, बल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।</p>
<p>देवी कुष्मांडा की आरती<br />
कुष्मांडा जय जग सुखदानी।<br />
मुझ पर दया करो रानी<br />
पिगनाला ज्वालामुखी अजीब।<br />
शाकंबारी मां भोली भाली।<br />
आपके लिए लाखों नाम अद्वितीय हैं।<br />
भक्तों, बहुत से शराबी तुम्हारे हैं।<br />
डेरा भीम पर्वत पर है।<br />
मेरा प्रणाम स्वीकार करो।<br />
जगदम्बे सबकी सुनते हैं।<br />
मां अम्बे तक पहुंचती है खुशियां<br />
मैं तुम्हारे दर्शन का प्यासा हूँ।<br />
मेरी आशा पूरी करो।<br />
ममता के मन में भारी है।<br />
आप हमारी प्रार्थना क्यों नहीं सुनते?<br />
मैंने आपके दर पर डेरा डाला है।<br />
मेरा कष्ट दूर करो।<br />
मेरे कर्तव्यों को पूरा करें<br />
मेरा खजाना भर दो।<br />
आपका नौकर आपकी परवाह करता है।<br />
भक्त आपको नमन करते हैं।</p>
<p>देवी कुष्मांडा का मंत्र<br />
या देवी सर्वभूतेतेशु में कुष्मांडा के रूप में संस्था।<br />
नमस्ते नमस्तस्य नमस्तस्य नमो नमः&#8230;</p>
<p>वन्दे कामर्थेचन्द्रार्घकृतशेखरम्।<br />
सिंहरुढाअष्टभुजा कुष्मांडायशस्वनीम्॥</p>
<p>सुरासम्पूर्णकलशं रुधिरप्लुतमेव च।<br />
दधना हस्तपद्माभ्य कुष्मांडा शुभदास्तु में।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>नवरात्रि के तीसरे दिन करें चंद्रघंटा माता पूजा, जानिए आरती और मंत्र</title>
		<link>https://blesstvlive.com/on-the-third-day-of-navratri-do-chandraghanta-mata-pooja-know-aarti-and-mantra/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Apr 2022 05:47:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2022]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2022 Day 3]]></category>
		<category><![CDATA[Chandraghanta Devi aarti]]></category>
		<category><![CDATA[Chandraghanta Devi Puja]]></category>
		<category><![CDATA[Chandraghanta Devi Worship]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri 2022]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri Puja rituals]]></category>
		<category><![CDATA[third day of Navratri]]></category>
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					<description><![CDATA[चैत्र नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। यह दिन देवी चंद्रघंटा के चंद्रमा को समर्पित है। इसलिए इस दिन चंद्रघंटा माता की पूजा से पहले पूजा और आरती की जाती है। देवी चंद्रघंटा के सिर पर चंद्रमा की आकृति है, इसलिए उन्हें &#8216;चंद्रघंटा&#8217; देवी कहा जाता है। देवी चंद्रघंटा के सभी हाथों में हथियार हैं।...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>चैत्र नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। यह दिन देवी चंद्रघंटा के चंद्रमा को समर्पित है। इसलिए इस दिन चंद्रघंटा माता की पूजा से पहले पूजा और आरती की जाती है। देवी चंद्रघंटा के सिर पर चंद्रमा की आकृति है, इसलिए उन्हें &#8216;चंद्रघंटा&#8217; देवी कहा जाता है। देवी चंद्रघंटा के सभी हाथों में हथियार हैं। देवी दुर्गा के इस रूप की पूजा करने से भक्त के साहस में वृद्धि होती है। एक धार्मिक मान्यता है कि सिंह पर सवार होकर देवी चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों के दुख दूर हो जाते हैं। इसके अलावा देवी की पूजा करने से मन को शांति मिलती है। आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा और आरती की विधि।</p>
<p>देवी चंद्रघंटा की पूजा<br />
शास्त्रों के अनुसार लाल वस्त्र धारण कर मां चंद्रघंटा की पूजा करनी चाहिए। पूजा में लाल फूल, रक्त चंदन और लाल चुनरी देवी को अर्पित करनी चाहिए। साथ ही ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए &#8216;ऐश्वर्य यतप्रसादें सौभाग्य-आरोग्यसंपदाः शत्रु हनी पर मोक्षः स्तुयते सा ना की जाने&#8217; मंत्र का जाप करना चाहिए। देवी की पूजा के प्रत्येक रूप में विभिन्न प्रकार के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। दूध या उससे बनी मिठाई को प्रसाद के रूप में चंद्रघंटा माता को अर्पित करना चाहिए और ग्रहण कर दूसरों को बांटना चाहिए।</p>
<p>देवी चंद्रघंटा को प्रसन्न करने का मंत्र<br />
यह देवी सर्वभुतशु माँ चंद्रघण्टारूपेण संस्था<br />
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः</p>
<p>पिंडज प्रवररुधा चन्दकोपास्त्रकार्युत<br />
प्रसादम तनुते महायम चंद्रघण्टेति विस्रुत:</p>
<p>देवी चंद्रघंटा की आरती<br />
नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा ध्यान<br />
माथे पर अर्धचंद्र है, एक फीकी मुस्कान है</p>
<p>तलवार के साथ दस हाथों में कवच<br />
समय के वचन के साथ दुष्ट हरे का जीवन</p>
<p>सिंह वाहिनी दुर्गा का चमकता हुआ सुनहरा शरीर<br />
कार्ति विपदा शांति हरे भक्त की पीर</p>
<p>मधुर वाणी बोलकर सबको ज्ञान देना<br />
मैं भव सागर में फंसा हुआ हूँ, मेरा कल्याण करो</p>
<p>नवरात्रि की माता, कृपा करें माता<br />
जय मां चंद्रघंटा, जय मां चंद्रघंटा</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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