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	<title>lod shiva &#8211; Bless TV</title>
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		<title>वडकुनाथन: भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा मंदिर</title>
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		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:34:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वडकुनाथन मंदिर केरल में है। वडकुनाथन मलयाली भाषा का शब्द है। वडकुनाथन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर त्रिशूर में है। पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रिशूर शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा है। त्रिशूर महाभारतकालीन शहर है। यह वही मंदिर है, जहां आदि शंकराचार्य के माता-पिता ने संतान प्राप्ति के लिए अनुष्ठान किए...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वडकुनाथन</strong> मंदिर केरल में है। वडकुनाथन मलयाली भाषा का शब्द है। वडकुनाथन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर त्रिशूर में है। पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रिशूर शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा है। त्रिशूर महाभारतकालीन शहर है। यह वही मंदिर है, जहां आदि शंकराचार्य के माता-पिता ने संतान प्राप्ति के लिए अनुष्ठान किए थे। वडकुनाथन मंदिर 60 एकड़ में फैला हुआ है।</p>
<p>जहां कभी घना सागौन का जंगल हुआ करता था। भूतपूर्व कोचिन रियासत के महाराजा राम वर्मा (1790-1805) के समय में त्रिशूर रियासत की राजधानी भी रहा है। यह नगर के मध्य में ही 9 एकड़ में फैला ऊंचे परकोटे वाला एक विशाल शिव मंदिर है। इस मंदिर में हर वर्ष आनापुरम महोत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें हाथियों को खाना खिलाया जाता है।</p>
<p>इस महोत्सव की शुरुआत में सबसे छोटे हाथी को भोजन देकर हाथियों का भोज शुरू किया जाता है। उन्हें गुड़, घी और हल्दी के साथ मिलाए चावल खाने को दिए जाते हैं। इसके साथ ही भोजन में नारियल, ककड़ी, गन्ना आदि भी शामिल होते हैं। यहां आदि शंकराचार्य की तथाकथित समाधि भी बनी है और उसके साथ एक छोटा सा मंदिर जिसमें उनकी मूर्ति भी स्थापित है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि आदि शंकराचार्य की एक समाधि केदारनाथ मंदिर के पीछे भी है। वडकुनाथन मंदिर संरक्षण के लिए यूनेस्को का उत्कृष्टता  पुरस्कार 2015 भी मिल चुका है। यह मंदिर वर्षों पुरानी परंपराओं तथा वास्तु शास्त्र से प्राप्त संरक्षण की तकनीकों को समेटे हुए है।</p>
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		<title>इस झील में आज भी दिखाई देते है भगवान शिव के शेषनाग!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:34:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत में एक ऐसी झील स्थित है, जिसके बारे में सुन कर आपको बहुत हैरानी होगी। यह झील जम्मू और कश्मीर में अमरनाथ गुफा के समीप स्थित है। पहलगाम से इसकी दूरी करीब 32 किमी. और चंदनबाड़ी से लगभग 16 किमी. है। यह झील करीब डेढ़ किमी. की लंबाई में फैली हुई है। अमरनाथ यात्रा में...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत में एक ऐसी झील स्थित है, जिसके बारे में सुन कर आपको बहुत हैरानी होगी। यह झील जम्मू और कश्मीर में अमरनाथ गुफा के समीप स्थित है। पहलगाम से इसकी दूरी करीब 32 किमी. और चंदनबाड़ी से लगभग 16 किमी. है।</p>
<p>यह झील करीब डेढ़ किमी. की लंबाई में फैली हुई है। अमरनाथ यात्रा में शेषनाग झील का धार्मिक महत्त्व है। सर्दियों में यह झील जम जाती है और यहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।</p>
<p>किंवदंतियों के अनुसार इस झील में शेषनाग का वास है और वे दिन में एक बार झील के बाहर दर्शन देते हैं परंतु यह दर्शन खुशनसीबों को ही प्राप्त होते हैं। कहा जाता है कि जब भोलेनाथ माता पार्वती को अमर कथा सुनाने के लिए लेकर जा रहे थे, तो उन्होंने अपने सांपों-नागों को अनंतनाग में, नंदी को पहलगाम में, चंद्रमा को चंदनबाड़ी में और शेषनाग को इस झील में छोड़ दिया था।</p>
<p>भोलेनाथ नहीं चाहते थे कि इस कथा को कोई और सुने क्योंकि कोई दूसरा इस कथा को सुन लेता, तो वह अमर हो जाता और सृष्टि का मूल सिद्धांत गड़बड़ हो जाता इसलिए भगवान शिव ने शेषनाग को झील में छोड़ दिया था। ताकि कोई इस झील को पार करके आगे न जा पाए। माना जाता है कि आज भी शेषनाग झील के पानी में दिखाई देते हैं।</p>
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