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	<title>Holi Special &#8211; Bless TV</title>
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		<title>होली 2022: रंगपंचमी खेलने के लिए आप कौन सा रंग चुनेंगे?, जानिए हर रंग का महत्व!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Mar 2022 05:49:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[होली (Holi 2022) 17 मार्च को मनाई जाएगी। भारत में होली का बहुत महत्व है। होली बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। धुलीवंदन, जिसे रंगों का त्योहार भी कहा जाता है, होली के दूसरे दिन मनाया जाता है। रंगपंचमी इस दिन अलग-अलग रंगों को बिखेरकर और एक-दूसरे के चेहरों को रंगकर मनाई जाती है।...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>होली (Holi 2022) 17 मार्च को मनाई जाएगी। भारत में होली का बहुत महत्व है। होली बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। धुलीवंदन, जिसे रंगों का त्योहार भी कहा जाता है, होली के दूसरे दिन मनाया जाता है। रंगपंचमी इस दिन अलग-अलग रंगों को बिखेरकर और एक-दूसरे के चेहरों को रंगकर मनाई जाती है। रंगपंचमी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला हर रंग भी महत्वपूर्ण है। यह रंग सुख, सौभाग्य और समृद्धि का भी प्रतीक माना जाता है। आज हम यह पता लगाने जा रहे हैं कि इस साल की होली के लिए आप कौन सा रंग चुनेंगे और इस रंग का क्या महत्व है।</p>
<p>लाल रंग &#8211;<br />
लाल रंग से रंगपंचमी खेलने से स्वास्थ्य व मान-सम्मान में वृद्धि होती है। लाल रंग को ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p>हरा रंग &#8211;<br />
हरे रंग के साथ रंगपंचमी खेलने से सुख, समृद्धि, प्रेम, प्रगति और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। हरे रंग को समृद्धि, प्रेम, प्रगति और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। हरा रंग जीवन में शांति लाता है।</p>
<p>पीला रंग &#8211;<br />
पीले रंग से होली-रंगपंचमी खेलने से प्रेम, सौंदर्य और सुख में वृद्धि होती है। भगवान कृष्ण को पीला रंग बहुत प्रिय है। पीला रंग निराशा को दूर करता है।</p>
<p>गुलाबी रंग &#8211;<br />
गुलाबी रंग से रंगपंचमी खेलने से प्रेम बढ़ता है। इस गुलाबी रंग या गुलाल से आप अपने साथी के साथ होली-रंगपंचमी खेलें। इससे आपके रिश्ते एक दूसरे के साथ और भी मजबूत होंगे।</p>
<p>नीला रंग &#8211;<br />
नीले रंग से रंगपंचमी खेलने से सेहत में लाभ होता है। आप बीमार लोगों को नीला रंग दे सकते हैं। नीले रंग का प्रयोग सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है।</p>
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		<title>आज से शुरू हो रहा है होलाष्टक, जानिए अच्छी-बुरी बातें!</title>
		<link>https://blesstvlive.com/holashtak-is-starting-from-today-good-and-bad-things/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Mar 2022 10:10:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
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					<description><![CDATA[होली का त्योहार बस कुछ ही दिन दूर है। होली (Holi 2022) पूरे देश में बड़े ही उत्साह के साथ मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस पर्व का बहुत महत्व है। कोकण में इस पर्व का विशेष महत्व है। कैलेंडर के अनुसार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन होली (Holi Special) मनाई...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>होली का त्योहार बस कुछ ही दिन दूर है। होली (Holi 2022) पूरे देश में बड़े ही उत्साह के साथ मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस पर्व का बहुत महत्व है। कोकण में इस पर्व का विशेष महत्व है। कैलेंडर के अनुसार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन होली (Holi Special) मनाई जाती है. होली से पहले के आठ दिन होलाष्टक कहलाते हैं। इस वर्ष 10 मार्च आज से होलाष्टक की शुरुआत है। होली की तरह होलाष्टक का भी बहुत महत्व है।</p>
<p>होलाष्टक शब्द होली और अष्टक का मेल है। होलाष्टक के दौरान कुछ चीजें करना शुभ और अशुभ माना जाता है। होलाष्टक के दौरान घर में प्रवेश करना, ज्वाला हटाने का कार्यक्रम करना, विवाह समारोह आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। लेकिन होलाष्टक का यह समय पूजा के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। आज हम जानेंगे कि होलाष्टक के दौरान कौन सी चीजें अच्छी होती हैं और कौन सी बुरी।</p>
<p>ज्योतिषियों के अनुसार होलाष्टक के आठ दिनों का वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इन दिनों सभी ग्रहों का प्रभाव नकारात्मक हो जाता है। होलाष्टक अष्टमी तिथि से प्रारंभ होता है। ऐसे में अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को बृहस्पति, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा पर राहु जैसे ग्रह बहुत नकारात्मक होते हैं। वर्तमान परिवेश व्यक्ति की सोचने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। जिससे व्यक्ति गलत निर्णय ले सकता है।</p>
<p>साथ ही ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव के कारण होलाष्टक काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकता है। इससे आपका काम बिगड़ सकता है। इसलिए होलाष्टक में भगवान का नाम लेना और उनकी पूजा करना बहुत शुभ होता है। लेकिन इन दिनों कोई भी शुभ कार्य वर्जित नहीं है। इसलिए होलाष्टक काल में किसी भी शुभ कार्य से बचना चाहिए।</p>
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