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	<title>Chaitra Navratri 2022 Day 3 &#8211; Bless TV</title>
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	<title>Chaitra Navratri 2022 Day 3 &#8211; Bless TV</title>
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		<title>नवरात्रि के तीसरे दिन करें चंद्रघंटा माता पूजा, जानिए आरती और मंत्र</title>
		<link>https://blesstvlive.com/on-the-third-day-of-navratri-do-chandraghanta-mata-pooja-know-aarti-and-mantra/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Apr 2022 05:47:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2022]]></category>
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		<category><![CDATA[Chandraghanta Devi aarti]]></category>
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					<description><![CDATA[चैत्र नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। यह दिन देवी चंद्रघंटा के चंद्रमा को समर्पित है। इसलिए इस दिन चंद्रघंटा माता की पूजा से पहले पूजा और आरती की जाती है। देवी चंद्रघंटा के सिर पर चंद्रमा की आकृति है, इसलिए उन्हें &#8216;चंद्रघंटा&#8217; देवी कहा जाता है। देवी चंद्रघंटा के सभी हाथों में हथियार हैं।...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>चैत्र नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। यह दिन देवी चंद्रघंटा के चंद्रमा को समर्पित है। इसलिए इस दिन चंद्रघंटा माता की पूजा से पहले पूजा और आरती की जाती है। देवी चंद्रघंटा के सिर पर चंद्रमा की आकृति है, इसलिए उन्हें &#8216;चंद्रघंटा&#8217; देवी कहा जाता है। देवी चंद्रघंटा के सभी हाथों में हथियार हैं। देवी दुर्गा के इस रूप की पूजा करने से भक्त के साहस में वृद्धि होती है। एक धार्मिक मान्यता है कि सिंह पर सवार होकर देवी चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों के दुख दूर हो जाते हैं। इसके अलावा देवी की पूजा करने से मन को शांति मिलती है। आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा और आरती की विधि।</p>
<p>देवी चंद्रघंटा की पूजा<br />
शास्त्रों के अनुसार लाल वस्त्र धारण कर मां चंद्रघंटा की पूजा करनी चाहिए। पूजा में लाल फूल, रक्त चंदन और लाल चुनरी देवी को अर्पित करनी चाहिए। साथ ही ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए &#8216;ऐश्वर्य यतप्रसादें सौभाग्य-आरोग्यसंपदाः शत्रु हनी पर मोक्षः स्तुयते सा ना की जाने&#8217; मंत्र का जाप करना चाहिए। देवी की पूजा के प्रत्येक रूप में विभिन्न प्रकार के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। दूध या उससे बनी मिठाई को प्रसाद के रूप में चंद्रघंटा माता को अर्पित करना चाहिए और ग्रहण कर दूसरों को बांटना चाहिए।</p>
<p>देवी चंद्रघंटा को प्रसन्न करने का मंत्र<br />
यह देवी सर्वभुतशु माँ चंद्रघण्टारूपेण संस्था<br />
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः</p>
<p>पिंडज प्रवररुधा चन्दकोपास्त्रकार्युत<br />
प्रसादम तनुते महायम चंद्रघण्टेति विस्रुत:</p>
<p>देवी चंद्रघंटा की आरती<br />
नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा ध्यान<br />
माथे पर अर्धचंद्र है, एक फीकी मुस्कान है</p>
<p>तलवार के साथ दस हाथों में कवच<br />
समय के वचन के साथ दुष्ट हरे का जीवन</p>
<p>सिंह वाहिनी दुर्गा का चमकता हुआ सुनहरा शरीर<br />
कार्ति विपदा शांति हरे भक्त की पीर</p>
<p>मधुर वाणी बोलकर सबको ज्ञान देना<br />
मैं भव सागर में फंसा हुआ हूँ, मेरा कल्याण करो</p>
<p>नवरात्रि की माता, कृपा करें माता<br />
जय मां चंद्रघंटा, जय मां चंद्रघंटा</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>नवरात्रि के तीसरे दिन करें चंद्रघंटा माता पूजा, जानिए आरती और मंत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Apr 2022 07:53:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2022]]></category>
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					<description><![CDATA[चैत्र नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। यह दिन देवी की मां चंद्रघंटा के रूप को समर्पित है। इसलिए इस दिन चंद्रघंटा माता की पूजा से पहले पूजा और आरती की जाती है। देवी चंद्रघंटा के सिर पर चंद्रमा की आकृति है, इसलिए उन्हें &#8216;चंद्रघंटा&#8217; देवी कहा जाता है। देवी चंद्रघंटा के सभी हाथों में...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>चैत्र नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। यह दिन देवी की मां चंद्रघंटा के रूप को समर्पित है। इसलिए इस दिन चंद्रघंटा माता की पूजा से पहले पूजा और आरती की जाती है। देवी चंद्रघंटा के सिर पर चंद्रमा की आकृति है, इसलिए उन्हें &#8216;चंद्रघंटा&#8217; देवी कहा जाता है। देवी चंद्रघंटा के सभी हाथों में हथियार हैं। देवी दुर्गा के इस रूप की पूजा करने से भक्त के साहस में वृद्धि होती है। एक धार्मिक मान्यता है कि सिंह पर सवार होकर देवी चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों के दुख दूर हो जाते हैं। इसके अलावा देवी की पूजा करने से मन को शांति मिलती है। आइए जानते हैं देवी चंद्रघंटा की पूजा और आरती</p>
<p>देवी चंद्रघंटा की पूजा<br />
शास्त्रों के अनुसार लाल वस्त्र धारण कर मां चंद्रघंटा की पूजा करनी चाहिए। पूजा में लाल फूल, रक्त चंदन और लाल चुनरी देवी को अर्पित करनी चाहिए। साथ ही ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए &#8216;ऐश्वर्य यतप्रसादें सौभाग्य-आरोग्यसंपदाः शत्रु हनी पर मोक्षः स्तुयते सा ना की जाने&#8217; मंत्र का जाप करना चाहिए। देवी की पूजा के प्रत्येक रूप में विभिन्न प्रकार के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। दूध या उससे बनी मिठाई को प्रसाद के रूप में चंद्रघंटा माता को अर्पित करना चाहिए और ग्रहण कर दूसरों को बांटना चाहिए।</p>
<p>देवी चंद्रघंटा को प्रसन्न करने का मंत्र<br />
यह देवी सर्वभुतशु माँ चंद्रघण्टारूपेण संस्था<br />
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः</p>
<p>पिंडज प्रवररुधा चन्दकोपास्त्रकार्युत<br />
प्रसादम तनुते महायम चंद्रघण्टेति विस्रुत:</p>
<p>चंद्रघंटा देवी आरती<br />
नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा ध्यान<br />
माथे पर अर्धचंद्र है, एक फीकी मुस्कान है</p>
<p>तलवार के साथ दस हाथों में कवच<br />
समय के वचन के साथ दुष्ट हरे का जीवन</p>
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