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	<title>bless &#8211; Bless TV</title>
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	<title>bless &#8211; Bless TV</title>
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		<title>श्री पटना साहिब: सिख धर्म का दूसरा प्रमुख तख्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:52:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सिख इतिहास में पटना साहिब (बिहार) का खास महत्व है. सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म यहीं 22 दिसंबर, 1666 को हुआ था. सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में दूसरा तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब हैं. सिखों के दसवें गुरु का न केवल यहां जन्म हुआ था, बल्कि उनका बचपन भी...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सिख इतिहास में पटना साहिब (बिहार) का खास महत्व है. सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म यहीं 22 दिसंबर, 1666 को हुआ था. सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में दूसरा तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब हैं.</p>
<p>सिखों के दसवें गुरु का न केवल यहां जन्म हुआ था, बल्कि उनका बचपन भी यहीं गुजरा था. यही नहीं सिखों के तीन गुरुओं के चरण इस धरती पर पड़े हैं. हरिमंदिर साहिब गुरु गोविंद सिंह की याद में बनाया गया है, जहां उनके कई स्मृति चिह्न आज भी श्रद्धालुओं के आस्था से जुड़े हैं.</p>
<p>भारत में कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे की तरह, श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब का निर्माण भी महाराजा रणजीत सिंह द्वारा करवाया गया है.</p>
<p>जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह बताते हैं कि हरिमंदिर साहिब पटना सिटी में चौक के पास झाउगंज मुहल्ले में स्थित है. कभी ये इलाका कूचा फरूख खान के नाम से जाना जाता था. अब इसे हरमंदिर गली के रूप में जाना जाता है. इसके आसपास तंग गलियों में व्यस्त बाजार है.</p>
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<div id="mainPlayerDiv-364482_1" class="zg-mainContainer">जिस समय गुरु महाराज का जन्म वर्तमान के तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में हुआ था, उस समय पिता व नवम गुरु तेग बहादुर जी गुरु मिशन की प्रचार के लिए धुबड़ी असम की यात्रा पर गए थे.</div>
</div>
</div>
<p>श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने अपनी रचना &#8216;दशमग्रंथ&#8217; में लिखा है, &#8216;तही प्रकाश हमारा भयो, पटना शहर बिखै भव लयो&#8217;।</p>
<p>पटना हरिमंदिर साहिब में आज भी गुरु गोविंद सिंह की वह छोटी पाण है, जो बचपन में वे धारण करते थे. इसके अलावे आने वाले श्रद्धालु उस लोहे की छोटी चकरी को, जिसे गुरु बचपन में अपने केशों में धारण करते थे तथा छोटा बघनख खंजर, जो कमर-कसा में धारण करते थे, को देखना नहीं भूलते.</p>
<p>गुरु तेग बहादुर जी महाराज जिस संदल लकड़ी के खड़ाऊं पहना करते थे, उसे भी यहां रखा गया है, जो श्रद्धालुओं की श्रद्धा से जुड़ा है.</p>
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		<title>जानें, कौन से स्थान हैं शिव जी को सबसे प्रिय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:47:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वाराणसी को शिव की अत्यंत प्रिय नगरियों में से एक माना जाता है. यह उत्तर प्रदेश में स्थित है, और अपने घाटों के लिए विख्यात है. माना जाता है कि यह शिव के त्रिशूल पर विद्यमान है. भगवान शिव का अति महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग &#8220;श्री कशीविश्वनाथ&#8221; भी यहीं स्थापित है. अगर जीवन में उच्च पद प्राप्त...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>वाराणसी को शिव की अत्यंत प्रिय नगरियों में से एक माना जाता है. यह उत्तर प्रदेश में स्थित है, और अपने घाटों के लिए विख्यात है. माना जाता है कि यह शिव के त्रिशूल पर विद्यमान है. भगवान शिव का अति महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग &#8220;श्री कशीविश्वनाथ&#8221; भी यहीं स्थापित है. अगर जीवन में उच्च पद प्राप्त करना हो या सफलता चाहिए हो तो वाराणसी जाना चाहिए. काशी में गंगा स्नान करके, विश्वनाथ मंदिर में जाकर दर्शन करना चाहिए. काशी में निवास करने और शिव जी की उपासना करने से मुक्ति मोक्ष तक का वरदान मिलता है.</p>
<p><b>उज्जैन</b></p>
<p>&#8211; भारत की प्राचीन सात नगरियों में से एक प्रमुख नगरी है &#8211; उज्जैन.</p>
<p>&#8211; शिव जी का अत्यंत शक्तिशाली ज्योतिर्लिंग &#8220;महाकालेश्वर&#8221; यहीं स्थापित है.</p>
<p>&#8211; यह ज्योतिर्लिंग दक्षिणमुखी है जो अपने आप में एक दुर्लभ बात है.</p>
<p>&#8211; उज्जैन में शिवलिंग की भस्म आरती का विशेष महत्व है.</p>
<p>&#8211; उज्जैन जाकर शिव जी का दर्शन करने से आयु रक्षा होती है तथा स्वास्थ्य उत्तम होता है.</p>
<p>&#8211; उज्जैन में ही मंगलनाथ का दर्शन करके शिव पूजन करने से मंगल दोष का नाश होता है.</p>
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<div>
<p><b>सौराष्ट्र</b></p>
<p>&#8211; भगवान शिव का पहला और अति प्राचीन शिवलिंग &#8220;सोमनाथ&#8221; यहीं स्थापित है.</p>
<p>&#8211; सौराष्ट्र में ही प्रभास क्षेत्र है , जहाँ श्रीकृष्ण ने शरीर त्याग किया था.</p>
<p>&#8211; सोमनाथ के ज्योतिर्लिंग की स्थापना चन्द्र देव ने की थी.</p>
<p>&#8211; यहीं पर शिव जी की कृपा से उन्हें शाप और पीड़ा से मुक्ति मिली थी.</p>
<p>&#8211; अगर जीवन में चन्द्रमा सम्बन्धी कोई समस्या है या किसी प्रकार का कोई श्राप या दोष है, तो सौराष्ट्र में सोमनाथ का विधिवत पूजन अर्चन करना चाहिए.</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>हनुमानगढ़ी: जहां रामलला के दर्शन से पहले लेनी पडती है हनुमान जी की आज्ञा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:46:14 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Hindu]]></category>
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					<description><![CDATA[अयोध्या को भगवान राम की नगरी कहा जाता है. ये मान्&#x200d;यता है कि यहां हनुमान जी सदैव वास करते हैं. इसलिए अयोध्&#x200d;या आकर भगवान राम के दर्शन से पहले भक्&#x200d;त हनुमान जी के दर्शन करते हैं. कहां है ये मंदिर  हनुमान गढ़ी, श्री हनुमान के मुख्य मंदिरो में से एक है. ये उत्तर प्रदेश की...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अयोध्या को भगवान राम की नगरी कहा जाता है. ये मान्&#x200d;यता है कि यहां हनुमान जी सदैव वास करते हैं. इसलिए अयोध्&#x200d;या आकर भगवान राम के दर्शन से पहले भक्&#x200d;त हनुमान जी के दर्शन करते हैं.</p>
<p><b>कहां है ये मंदिर </b><br />
हनुमान गढ़ी, श्री हनुमान के मुख्य मंदिरो में से एक है. ये उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 100 किमी दूर सीतापुर जिले में अयोध्या के पास है. यहां हनुमान जी की मूर्ती बलिष्ठ और लाल रंग में है.</p>
<p><b>क्&#x200d;यों भक्&#x200d;त पहले हनुमानगढ़ी जाते हैं </b><br />
मान्यता है कि भगवान राम जब लंका जीतकर अयोध्या लौटे, तो उन्होंने अपने प्रिय भक्त हनुमान को रहने के लिए यही स्थान दिया. साथ ही यह अधिकार भी दिया कि जो भी भक्त यहां दर्शन के लिए अयोध्या आएगा, उसे पहले हनुमान का दर्शन-पूजन करना होगा.</p>
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<div id="mainPlayerDiv-364482_1" class="zg-mainContainer"><b>कैसा है ये मंदिर </b></div>
<div class="zg-mainContainer">76 सीढ़ियों का सफर तय करने पर यहां भक्त पवनपुत्र के सबसे छोटे रूप के दर्शन करते हैं. ये हनुमान टीला है, जो हनुमानगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है. यहां पवनपुत्र हनुमान की 6 इंच की प्रतिमा है, जो हमेशा फूल-मालाओं से सुशोभित रहती है. हनुमान चालीसा की चौपाइयां मंदिर की दीवारों पर सुशोभित हैं.</div>
</div>
</div>
<p><b>क्&#x200d;यों खास है ये मंदिर </b><br />
इस मंदिर में दक्षिण मुखी हनुमान जी हैं. मान्&#x200d;यता है कि यहां दर्शन करने और हनुमान जी को लाल चोला चढ़ाने से ग्रह शांत हो जाते हैं, जीवन में सफलता और समृद्धि मिलती है. यह हनुमान जी का सिद्ध पीठ है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारत समूह धर्मो का गुलदस्ता है, इसे बिखरने नहीं देगें : शाही इमाम पंजाब</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:39:57 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Muslim]]></category>
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					<description><![CDATA[ ईद-उल-फितर के मौके पर लुधियाना जामा मस्जिद में हजारों मुसलमानों ने नमाज अदा की लुधियाना:  ईद का दिन नफरतों को मुहब्बत में बदलने का संदेश देता है। जो फिरकापरस्त ताकतें देश में नफरत की राजनीति करना चाहती हैं, उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह बात आज यहां पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना में...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong> ईद-उल-फितर के मौके पर लुधियाना जामा मस्जिद में हजारों मुसलमानों ने नमाज अदा की</strong></h1>
<div>लुधियाना:  ईद का दिन नफरतों को मुहब्बत में बदलने का संदेश देता है। जो फिरकापरस्त ताकतें देश में नफरत की राजनीति करना चाहती हैं, उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह बात आज यहां पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना में ईद उल फितर के मौके पर आयोजित राज्य स्तरीय समागम के दौरान हजारों मुसलमानों को संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कही। शाही इमाम ने कहा कि आज का दिन रोजा रखने वालों के लिए अल्लाह तआला की तरफ  से ईनाम है। उन्होंने कहा कि हम दुआ करते हैं कि आज का दिन दुनिया भर के लोगों के लिए अमन का संदेश लेकर आए। उन्होंने कहा कि देश की जनता की शक्ल में रह रहे करोड़ों हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, दलित आदि एक गुलदस्ता है और इस गुलदस्ते को किसी कीमत पर बिखरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जामा</div>
<div>मस्जिद लुधियाना से हमेशा आपसी भाई-चारे का संदेश दिया गया है, जिसकी मिसाल आज ईद के पवित्र मौके पर यहां मौजूद सभी धर्मों के धार्मिक तथा राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की मौजूदगी है। मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी के लिए लड़ी गई जंग से लेकर आज तक मुसलमानों ने अपने देश के लिए बेशुमार कुर्बानियां दी हैं जिन्हें नजरांदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आज मैं ईद के इस मुबारक मौके पर जहां पंजाब के सभी लोगों को मुबारकबाद देता हूं वहीं अल्लाह से दुआ करता हूं कि आज का दिन इस देश और हमारे राज्य के लिए रहमत और बरकत का पैगाम लेकर आए।</div>
<div> विधायक राकेश पांडे ने मुसलमानों को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा ईद का दिन हर एक भारतीय के लिए खुशी का दिन है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है जहां हर एक धर्म का त्योहार सभी लोग आपस में मिल जुल कर मनाते हैं। श्री पांडे ने कहा कि शाही इमाम साहिब ने हमेशा ही पंजाब में अमन और खुशहाली के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि मैं पंजाब सरकार की ओर से अपने तमाम मुसलमान भाईयों को ईद की मुबारकबाद देता हूं।</div>
<div></div>
<div>
<figure id="attachment_856" aria-describedby="caption-attachment-856" style="width: 300px" class="wp-caption aligncenter"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-856" src="http://blesstvlive.com/storage/2018/06/m2-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" /><figcaption id="caption-attachment-856" class="wp-caption-text">ईद की नमाज़ अदा करते हुए मुस्लिम भाईचारे के लोग.</figcaption></figure>
<p>विधायक सुरिन्द्र डाबर ने मुसलमानों को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि आज का दिन हम सबके लिए बड़ी खुशी का दिन है। उन्होंने कहा कि लुधियाना शहर में सभी धर्मों के लोगों का एक गुलदस्ता है। इसके सभी फूल अपनी खुशबू के साथ माहौल को खुशगवार बना कर रखते हैं। उन्होंने कहा कि लुधियाना की यह इतिहासिक जामा मस्जिद जहां मुसलमानों का मुख्य धार्मिक केन्द्र है, वहीं यह तमाम धर्मों के लोगों के लिए अमन और मुहब्बत की निशानी है।</p>
</div>
<div>इस मौके पर मुसलमानों को ईद की मुबारकबाद देते हुए लुधियाना से जिला कांग्रेस अध्यक्ष गुरप्रीत गोगी ने कहा कि ईद का दिन सिर्फ  मुसलमान भाईयों के लिए ही नहीं बल्कि सभी भारतीयों के लिए खुशी का दिन है। गोगी ने कहा कि मैं दुआ करता हूं कि यह खुशियों भरी रीत हमेशा ऐसे ही चलती रहे।</div>
<div>इस मौके पर अकाली दल शहरी के अध्यक्ष व पूर्व विधायक रणजीत सिंह ढिल्लों ने मुसलमान भाइयों को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि इस तपती हुई गर्मी में पूरा महीना मुसलमान रोजा रखता है और अपने खुदा की इबादत करता है, जिसके बदले में अल्लाह तआला अपने बंदों को ईद का पवित्र त्योहार तोहफे के तौर पर देता है। उन्होंने कहा कि आज के दिन हर मुसलमान अपने सारे गिले शिकवे भूल कर एक दूसरे को गले लगाता है।</div>
<div>मुस्लिम भाईयों को ईद की मुबारकबाद देते हुए पूर्व जेल मंत्री जत्थे. हीरा सिंह गाबडिय़ा ने कहा कि हमें इस बात पर गर्व महसूस होता है कि भारत विश्व का एकमात्र धर्म निरपेक्ष देश है जहां सभी धर्मों के लोग आपस में मिलजुल कर हर त्योहार को बहुत खुशी से मनाते हैं। इस मौके पर हीरा सिंह गाबडिय़ा ने ऐलान किया कि आने वाली 24 जून को गुरुद्वारा फेरुमान में विशेष सम्मान किया जाएगा।</div>
<div>इस मौके पर जामा मस्जिद लुधियाना में अपने मुस्लिम भाईयों को ईद की मुबारकबाद देने के लिए गुरद्वारा दुख निवारण साहिब के अध्यक्ष प्रितपाल सिंह, दुष्यंत पांडे, पूर्व मेयर हरचरण सिंह गोहलवडिय़ा, गुलाम हसन कैसर, पार्षद परमिंदर मेहता, नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान रहमानी लुधियानवी, हरभजन सिंह सोहल, सीनियर अकाली नेता बलजीत सिंह बिंद्रा, शरणजीत मिड्डा, सीनियर कांग्रेसी नेता अशोक गुप्ता,पार्षद गुरप्रीत सिंह गोपी व शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुसतकीम अहरारी विशेष रूप से उपस्थित थे।</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वडकुनाथन: भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा मंदिर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:34:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वडकुनाथन मंदिर केरल में है। वडकुनाथन मलयाली भाषा का शब्द है। वडकुनाथन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर त्रिशूर में है। पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रिशूर शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा है। त्रिशूर महाभारतकालीन शहर है। यह वही मंदिर है, जहां आदि शंकराचार्य के माता-पिता ने संतान प्राप्ति के लिए अनुष्ठान किए...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वडकुनाथन</strong> मंदिर केरल में है। वडकुनाथन मलयाली भाषा का शब्द है। वडकुनाथन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर त्रिशूर में है। पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रिशूर शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा है। त्रिशूर महाभारतकालीन शहर है। यह वही मंदिर है, जहां आदि शंकराचार्य के माता-पिता ने संतान प्राप्ति के लिए अनुष्ठान किए थे। वडकुनाथन मंदिर 60 एकड़ में फैला हुआ है।</p>
<p>जहां कभी घना सागौन का जंगल हुआ करता था। भूतपूर्व कोचिन रियासत के महाराजा राम वर्मा (1790-1805) के समय में त्रिशूर रियासत की राजधानी भी रहा है। यह नगर के मध्य में ही 9 एकड़ में फैला ऊंचे परकोटे वाला एक विशाल शिव मंदिर है। इस मंदिर में हर वर्ष आनापुरम महोत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें हाथियों को खाना खिलाया जाता है।</p>
<p>इस महोत्सव की शुरुआत में सबसे छोटे हाथी को भोजन देकर हाथियों का भोज शुरू किया जाता है। उन्हें गुड़, घी और हल्दी के साथ मिलाए चावल खाने को दिए जाते हैं। इसके साथ ही भोजन में नारियल, ककड़ी, गन्ना आदि भी शामिल होते हैं। यहां आदि शंकराचार्य की तथाकथित समाधि भी बनी है और उसके साथ एक छोटा सा मंदिर जिसमें उनकी मूर्ति भी स्थापित है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि आदि शंकराचार्य की एक समाधि केदारनाथ मंदिर के पीछे भी है। वडकुनाथन मंदिर संरक्षण के लिए यूनेस्को का उत्कृष्टता  पुरस्कार 2015 भी मिल चुका है। यह मंदिर वर्षों पुरानी परंपराओं तथा वास्तु शास्त्र से प्राप्त संरक्षण की तकनीकों को समेटे हुए है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>इस झील में आज भी दिखाई देते है भगवान शिव के शेषनाग!</title>
		<link>https://blesstvlive.com/sheshnag-lake/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:34:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत में एक ऐसी झील स्थित है, जिसके बारे में सुन कर आपको बहुत हैरानी होगी। यह झील जम्मू और कश्मीर में अमरनाथ गुफा के समीप स्थित है। पहलगाम से इसकी दूरी करीब 32 किमी. और चंदनबाड़ी से लगभग 16 किमी. है। यह झील करीब डेढ़ किमी. की लंबाई में फैली हुई है। अमरनाथ यात्रा में...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत में एक ऐसी झील स्थित है, जिसके बारे में सुन कर आपको बहुत हैरानी होगी। यह झील जम्मू और कश्मीर में अमरनाथ गुफा के समीप स्थित है। पहलगाम से इसकी दूरी करीब 32 किमी. और चंदनबाड़ी से लगभग 16 किमी. है।</p>
<p>यह झील करीब डेढ़ किमी. की लंबाई में फैली हुई है। अमरनाथ यात्रा में शेषनाग झील का धार्मिक महत्त्व है। सर्दियों में यह झील जम जाती है और यहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।</p>
<p>किंवदंतियों के अनुसार इस झील में शेषनाग का वास है और वे दिन में एक बार झील के बाहर दर्शन देते हैं परंतु यह दर्शन खुशनसीबों को ही प्राप्त होते हैं। कहा जाता है कि जब भोलेनाथ माता पार्वती को अमर कथा सुनाने के लिए लेकर जा रहे थे, तो उन्होंने अपने सांपों-नागों को अनंतनाग में, नंदी को पहलगाम में, चंद्रमा को चंदनबाड़ी में और शेषनाग को इस झील में छोड़ दिया था।</p>
<p>भोलेनाथ नहीं चाहते थे कि इस कथा को कोई और सुने क्योंकि कोई दूसरा इस कथा को सुन लेता, तो वह अमर हो जाता और सृष्टि का मूल सिद्धांत गड़बड़ हो जाता इसलिए भगवान शिव ने शेषनाग को झील में छोड़ दिया था। ताकि कोई इस झील को पार करके आगे न जा पाए। माना जाता है कि आज भी शेषनाग झील के पानी में दिखाई देते हैं।</p>
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		<title>इस मंदिर में शिव भोले हर साल देते हैं दर्शन &#124;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:31:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[﻿ यह है वो मंदिर यहाँ शिव भोले हर साल देते हैं वैसाखी से अगले शनिवार दर्शन! SHIVBADI AKA Drone Shiv Mandir (Temple) is located in village Ambota near Gagret (17 Kms away from the temple Chintapurni Mandir, Una, Himachal Pardesh. This temple is about 5000 years old. Devotees believe that Lord Shiva visit here...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><iframe src="https://www.youtube.com/embed/RIHubt80SYE" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"><span data-mce-type="bookmark" style="display: inline-block; width: 0px; overflow: hidden; line-height: 0;" class="mce_SELRES_start">﻿</span></iframe></p>
<p>यह है वो मंदिर यहाँ शिव भोले हर साल देते हैं वैसाखी से अगले शनिवार दर्शन!</p>
<p><strong>SHIVBADI AKA Drone Shiv Mandir</strong> (Temple) is located in village Ambota near Gagret (17 Kms away from the temple Chintapurni Mandir, Una, Himachal Pardesh.</p>
<p>This temple is about 5000 years old. Devotees believe that Lord Shiva visit here every year. The temple is said to have a rich history behind from the times of Guru Drone (Drona or Dronacharya).</p>
<p>The temple and the dense forest of special spiral branch trees around. It is once said to be the Drone Nagri (VILLAGE OF DRONACHARYA). He was the Guru of royal families, Pandavas and Kauravas.</p>
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		<title>बीमारियों को जड़ से मिटाने के लिए नारियल पानी है सबसे ज्यादा फायदेमंद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:28:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सेहत को ठीक रखने के लिए नारियल पानी बहुत ज्यादा फायदेमंद है। इससे बीमारियां जल्दी खत्म हो जाती है। नारियल पानी न सिर्फ हम लोगों को गर्मी से बचाएं रखता है बल्कि स्वास्थ्य संबंधी अन्य कई समस्याओं को भी दूर करता है। नारियल पानी में विषाक्त तत्वों को दूर करने का गुण पाया जाता है।...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सेहत को ठीक रखने के लिए नारियल पानी बहुत ज्यादा फायदेमंद है। इससे बीमारियां जल्दी खत्म हो जाती है। नारियल पानी न सिर्फ हम लोगों को गर्मी से बचाएं रखता है बल्कि स्वास्थ्य संबंधी अन्य कई समस्याओं को भी दूर करता है। नारियल पानी में विषाक्त तत्वों को दूर करने का गुण पाया जाता है। नारियल पानी पीने से शरीर को ऊर्जा मिलती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बूस्ट होती है और साथ ही ये कई तरह की बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने का भी काम करता है।</p>
<p>फायदे :</p>
<p>हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बहुत लोगों को गर्मी के दिनों में हो ही जाती है। इस प्रकार के लोगों के लिए नारियल का पानी बहुत लाभकारी सिद्ध होता है। इसमें मैग्नीशिय, विटामिन सी तथा पोटैशियम होता है। ये अवयव ब्लड प्रैशर को कंट्रोल करने में बहुत कारगर होते हैं।</p>
<p>किडनी को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी नारियल पानी का सेवन करना अच्छा रहता है, ये यूरीनरी ट्रैक को साफ रखने में मददगार होता है और साथ ही किडनी में स्टोन को नहीं पनपने देता है। त्वचा को पोषण देने के लिए भी नारियल पानी पीना फायदेमंद रहता है ,नारियल पानी पीने से त्वचा की नमी भी बनी रहती है।</p>
<p>पेट की बीमारियों से यह आपको बचाए रखता है। खासतौर से डाइजेस्ट सिस्टम को फिट रखने में नारियल पानी का रोल अहम है। उल्टी और लूज मोशन में नारियल पानी आपको बेहद राहत देता है।</p>
<p>नारियल पानी आपकी त्वचा की समस्याओं से आपको छुटकारा दिलाता है। असल में यह आपके शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकाल देता है। इस कारण आपकी त्वचा स्वच्छ और स्वस्थ बनी रहती है।</p>
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		<title>मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर जहां होती है हर मनोकामना पूरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:27:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर काशी के सप्तसागर (कर्णघंटा) क्षेत्र में स्थित है. दुर्गा की पूजा के क्रम में ब्रह्मचारिणी देवी का दर्शन-पूजन बहुत महत्&#x200d;वपूर्ण माना गया है. सुबह से ही लग जाती है भीड़  काशी के गंगा किनारे बालाजी घाट पर स्थित मां ब्रह्मचारिणी के मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है. श्रद्धालु...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर काशी के सप्तसागर (कर्णघंटा) क्षेत्र में स्थित है. दुर्गा की पूजा के क्रम में ब्रह्मचारिणी देवी का दर्शन-पूजन बहुत महत्&#x200d;वपूर्ण माना गया है.</p>
<p><b>सुबह से ही लग जाती है भीड़ </b><br />
काशी के गंगा किनारे बालाजी घाट पर स्थित मां ब्रह्मचारिणी के मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है. श्रद्धालु लाइन में लगकर मां का दर्शन प्राप्त करते हैं. श्रद्धालु मां के इस रूप का दर्शन करने के लिए नारियल, चुनरी, माला-फूल आदि लेकर श्रद्धा-भक्ति के साथ अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं.</p>
<p><b>मां के दर्शन करने से मिलती है परब्रह्म की प्राप्ति</b><br />
ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है. इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बायें हाथ में कमंडल रहता है. जो देवी के इस रूप की आराधना करता है उसे साक्षात परब्रह्म की प्राप्ति होती है. मां के दर्शन मात्र से श्रद्धालु को यश और कीर्ति प्राप्त होती है.</p>
<p><b>हर मनोकामना होती है पूरी </b><br />
यहां ना सिर्फ काशी बल्कि अन्य जिलों से भी लोग दर्शन एवं पूजन के लिए आते हैं. नवरात्रि पर तो इस मंदिर में लाखों भक्त माँ के दर्शन करने के लिए आते है. ऐसी मान्यता है कि मां के इस रूप का दर्शन करने वालों को संतान सुख मिलता है. साथ ही वो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं.</p>
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		<title>कई रोगों का इलाज है मुलेठी, जानें सेवन का सही तरीका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:21:55 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Dark Forest Mulethi]]></category>
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					<description><![CDATA[स्वाद में मीठी मुलेठी कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन और वसा के गुणों से भरपूर होती है. इसका इस्तेमाल नेत्र रोग, मुख रोग, कंठ रोग, उदर रोग, सांस विकार, हृदय रोग, घाव के उपचार के लिए सदियों से किया जा रहा है. यह बात, कफ, पित्त तीनों दोषों को शांत करके कई रोगों के...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>स्वाद में मीठी मुलेठी कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन और वसा के गुणों से भरपूर होती है. इसका इस्तेमाल नेत्र रोग, मुख रोग, कंठ रोग, उदर रोग, सांस विकार, हृदय रोग, घाव के उपचार के लिए सदियों से किया जा रहा है. यह बात, कफ, पित्त तीनों दोषों को शांत करके कई रोगों के उपचार में रामबाण का काम करती है.</p>
<p>मुलेठी के क्वाथ से नेत्रों को धोने से नेत्रों के रोग दूर होते हैं. मुलेठी की मूल चूर्ण में बरबर मात्रा में सौंफ का चूर्ण मिलाकर एक चम्मच प्रात: सायं खाने से आंखों की जलन मिटती है तथा नेत्र ज्योति बढ़ती है. मुलेठी को पानी में पीसकर उसमें रूई का फाहा भिगोकर नेत्रों पर बांधने से नेत्रों की लालिमा मिटती है.</p>
<p>मुलेठी कान और नाक के रोग में भी लाभकारी है. मुलेठी और द्राक्षा से पकाए हुए दूध को कान में डालने से कर्ण रोग में लाभ होता है. 3-3 ग्राम मुलेठी तथा शुंडी में छह छोटी इलायची तथा 25 ग्राम मिश्री मिलाकर, क्वाथ बनाकर 1-2 बूंद नाक में डालने से नासा रोगों का शमन होता है.</p>
<p>मुंह के छाले मुलेठी मूल के टुकड़े में शहद लगाकर चूसते रहने से लाभ होता है. मुलेठी को चूसने से खांसी और कंठ रोग भी दूर होता है. सूखी खांसी में कफ पैदा करने के लिए इसकी 1 चम्मच मात्रा को मधु के साथ दिन में 3 बार चटाना चाहिए. इसका 20-25 मिली क्वाथ प्रात: सायं पीने से श्वास नलिका साफ हो जाती है. मुलेठी को चूसने से हिचकी दूर होती है.</p>
<p>मुलेठी हृदय रोग में भी लाभकारी है. 3-5 ग्राम तथा कुटकी चूर्ण को मिलाकर 15-20 ग्राम मिश्री युक्त जल के साथ प्रतिदिन नियमित रूप से सेवन करने से हृदय रोगों में लाभ होता है. इसके सेवन से पेट के रोग में भी आराम मिलता है. मुलेठी का क्वाथ बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से उदरशूल मिटता है.</p>
<p>त्वचा रोग भी यह लाभकारी है. पफोड़ों पर मुलेठी का लेप लगाने से वे जल्दी पककर फूट जाते हैं. मुलेठी और तिल को पीसकर उससे घृत मिलाकर घाव पर लेप करने से घाव भर जाता है.</p>
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