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	<title>Muslim &#8211; Bless TV</title>
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	<title>Muslim &#8211; Bless TV</title>
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		<title>खजूर काजू-बादाम से ज्यादा महंगा होता है, इस साल रमजान में सबसे ज्यादा रेट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Mar 2023 05:18:52 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[What is the benefit of Khajur?]]></category>
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					<description><![CDATA[काजू-बादाम से खजूर सबसे महंगा हो गया है। खजूर खूब खाए हैं। रमजान के महीने में खजूर को सबसे अहम माना जाता है। व्रत खोलते समय खजूर खाकर इसे तोड़ती हैं। इसलिए तिथियां महत्वपूर्ण हैं। अब आपको तारीखों के लिए दोगुना भुगतान करना होगा। लगभग 1 किलो खजूर से 1300 तक मिल जाते हैं। लेकिन...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>काजू-बादाम से खजूर सबसे महंगा हो गया है। खजूर खूब खाए हैं। रमजान के महीने में खजूर को सबसे अहम माना जाता है। व्रत खोलते समय खजूर खाकर इसे तोड़ती हैं। इसलिए तिथियां महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p>अब आपको तारीखों के लिए दोगुना भुगतान करना होगा। लगभग 1 किलो खजूर से 1300 तक मिल जाते हैं। लेकिन अब ये खजूर 2600 रुपए में मिल रहा है।</p>
<p>बेशक, सभी खजूर की कीमत 2600 रुपए नहीं है। यह खजूर की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। लेकिन अगर आप अच्छी क्वालिटी का खजूर खरीदते हैं तो यह 2600 रुपए में मिल जाता है।</p>
<p>रमजान को लेकर खजूर की डिमांड बढ़ गई है। ये तस्वीरें हैदराबाद के एक खजूर की दुकान की हैं।</p>
<p>एक खजूर विक्रेता ने कहा, &#8220;मैं खजूर के कारोबार में 22 साल से हूं। हम खजूर की कई किस्में बेचते हैं, जिसमें अजवा खजूर भी शामिल है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Muharram 2022: मुहर्रम क्यों मनाया जाता है? हजरत इमाम हुसैन कौन थे? सब कुछ जानिए</title>
		<link>https://blesstvlive.com/why-is-muharram-celebrated-who-was-hazrat-imam-hussain-know-everything/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Aug 2022 06:59:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Lifestyle]]></category>
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		<category><![CDATA[Muharram History]]></category>
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					<description><![CDATA[मुहर्रम 2022: इस्लाम के अनुसार हजरत इमाम हुसैन 72 साथियों के साथ मुहर्रम के 10वें दिन कर्बला के मैदानी इलाकों में शहीद हुए थे. इसलिए इस दिन को उनकी शहादत और बलिदान के रूप में याद किया जाता है। इराक में यज़ीद नाम का एक क्रूर राजा था और उसे मानवता का दुश्मन कहा जाता...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मुहर्रम 2022: इस्लाम के अनुसार हजरत इमाम हुसैन 72 साथियों के साथ मुहर्रम के 10वें दिन कर्बला के मैदानी इलाकों में शहीद हुए थे. इसलिए इस दिन को उनकी शहादत और बलिदान के रूप में याद किया जाता है। इराक में यज़ीद नाम का एक क्रूर राजा था और उसे मानवता का दुश्मन कहा जाता था।</p>
<p>यज़ीद अल्लाह पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं करता था। यज़ीद भी चाहते थे कि हज़रत इमाम हुसैन उनके समूह में शामिल हों। लेकिन इमाम साहब ने यह नहीं माना। उसने बादशाह यज़ीद के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी। इस युद्ध में वह अपने बेटे, परिवार के सदस्यों और अन्य साथियों के साथ शहीद हो गए थे। इसलिए इस्लाम के लोगों के लिए यह महीना बहुत महत्वपूर्ण है।हज़रत इमाम हुसैन इस्लाम के संस्थापक हज़रत मुहम्मद के सबसे छोटे पोते थे। उनकी शहादत की याद में मुहर्रम के महीने के दसवें दिन लोग शोक मनाते हैं, जिसे आशूरा के नाम से भी जाना जाता है।</p>
<p>हजरत इमाम हुसैन कौन थे?<br />
हजरत इमाम हुसैन पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद के पोते थे। इमाम हुसैन के पिता का नाम मोहताराम &#8216;शेरे-खुदा&#8217; अली था और वह पैगंबर के दामाद थे। इमाम हुसैन की माता का नाम बीबी फातिमा था। मुसलमानों के तत्कालीन धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक नेता और खलीफा हजरत अली की मृत्यु के बाद, लोग चाहते थे कि इमाम हुसैन खलीफा बने। लेकिन तब हजरत अमीर मुआविया ने खिलाफत पर कब्जा कर लिया। उसका पुत्र यज़ीद तब खलीफा बना। यज़ीद एक क्रूर शासक था, लेकिन वह इमाम हुसैन से डरता था। लोगों को यज़ीद की क्रूरता से बचाने के लिए इमाम हुसैन ने यज़ीद के खिलाफ कर्बला की लड़ाई लड़ी और अपने 72 साथियों के साथ शहीद हो गए।</p>
<p>आज भारत में आशूरा है<br />
मुहर्रम की शुरुआत 31 जुलाई को भारत में हुई थी। इस महीने का क्लेम डे आज यानी 9 अगस्त है। तो आज भारत में आशूरा है। भारत के साथ-साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश भी 9 अगस्त 2022 को आशुरा मना रहे हैं। लेकिन मुहर्रम 30 जुलाई से सऊदी अरब, ओमान, कतर, इराक, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य अरब देशों में शुरू हो गया। इसलिए वहां 8 अगस्त को आशूरा मनाया गया।</p>
<p>मुहर्रम कैसे मनाया जाता है?<br />
मुहर्रम के 10वें दिन यानी आशूरा के दिन ताजिया का जुलूस निकाला जाता है। इराक में इमाम हुसैन की दरगाह है। वहां उनकी बिल्कुल नकल की जाती है और ताजिया बनाया जाता है। शिया उलेमा के अनुसार मुहर्रम के चांद निकलने की पहली तारीख को ताजिया मनाया जाता है। इस दिन लोग इमाम हुसैन की शहादत के लिए ताजिया और जुलूस निकालते हैं। लेकिन ताजिया हटाने की परंपरा शिया समुदाय में ही है।</p>
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		<title>रमजान का महीना कब शुरू होता है, इफ्तार और धार्मिक मान्यताओं के लिए सही समय का पता लगाएं</title>
		<link>https://blesstvlive.com/when-does-the-month-of-ramadan-begin-find-the-right-time-for-iftar-and-religious-beliefs/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rohit Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 Apr 2022 07:18:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Muslim]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Ramadan 2022]]></category>
		<category><![CDATA[Ramadan 2022 news in hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Ramadan Eid 2022]]></category>
		<category><![CDATA[Ramadan Eid Importance]]></category>
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					<description><![CDATA[मुस्लिम धर्म में रमजान का महीना बेहद पवित्र माना जाता है। मुस्लिम धर्म में रमजान के महीने का खास महत्व है। इस महीने को पाक महीना भी कहा जाता है। रमजान के पूरे महीने में मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं और पूरे महीने रोजा रखते हैं। मुस्लिम कैलेंडर के मुताबिक इस साल रमजान का...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मुस्लिम धर्म में रमजान का महीना बेहद पवित्र माना जाता है। मुस्लिम धर्म में रमजान के महीने का खास महत्व है। इस महीने को पाक महीना भी कहा जाता है। रमजान के पूरे महीने में मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं और पूरे महीने रोजा रखते हैं। मुस्लिम कैलेंडर के मुताबिक इस साल रमजान का महीना 3 अप्रैल 2022 से शुरू हो रहा है. मुस्लिम समुदाय में 29 या 30 दिन के रोजे रखे जाते हैं। अंत में, रमजान का महीना ईद उल फितर के जश्न के साथ समाप्त होता है। रमजान में रोजा 29 दिन या 30 दिन का होगा जो चांद दिखने पर निर्भर करेगा। रमज़ान के महीने का समापन ईद मनाने से तभी होता है जब आसमान में चाँद दिखाई देता है और अंत में जब चाँद दिखाई देता है।</p>
<p>रमजान का महीना कब तक होगा?<br />
इस साल रमजान का पवित्र महीना 3 अप्रैल 2022 से शुरू होकर 1 मई 2022 तक चलेगा। हालांकि इस महीने की आखिरी तारीख चंद्र ग्रहण पर निर्भर करेगी।</p>
<p>जानिए इफ्तार का समय<br />
दिल्ली &#8211; सहरी का समय &#8211; सुबह 04:56 बजे, इफ्तार &#8211; शाम 06:38 बजे।<br />
मुंबई &#8211; सहरी समय &#8211; 05:22 पूर्वाह्न, इफ्तार &#8211; 06:52 बजे।<br />
कोलकाता &#8211; सहरी का समय &#8211; सुबह 04:17 बजे, इफ्तार &#8211; शाम 05:51 बजे।<br />
कानपुर &#8211; शहरी समय &#8211; सुबह 04:46 बजे, इफ्तार &#8211; 06:25 बजे।<br />
हैदराबाद &#8211; सहरी का समय &#8211; सुबह 05:01, इफ्तार &#8211; शाम &#8211; 06:30 बजे।<br />
चेन्नई &#8211; सहरी का समय &#8211; सुबह 04:46 बजे, इफ्तार &#8211; 06:21 बजे।<br />
सूरत &#8211; सहरी का समय &#8211; सुबह 05:21 बजे, इफ्तार &#8211; 06:53 बजे।<br />
पुणे &#8211; सहरी का समय &#8211; सुबह 05:19, इफ्तार &#8211; शाम &#8211; 06:48 बजे।<br />
अहमदाबाद &#8211; सहरी समय &#8211; 05:20 पूर्वाह्न, इफ्तार &#8211; 05:55 बजे।</p>
<p>धार्मिक विश्वास क्या है?<br />
ऐसा माना जाता है कि पैगंबर मुहम्मद (उन पर शांति) को उनकी दृढ़ता और कठोर तपस्या का फल इसी महीने में मिला और उन्होंने अल्लाह को देखा। उपवास को आत्मा की शुद्धि, आचरण की शुद्धि माना जाता है। मुस्लिम कैलेंडर के अनुसार रमजान नौवां महीना है। हर घर में छोटी और बड़ी मंडलियां इस महीने रोजा रखती हैं। रमजान के पवित्र महीने में चांद दिखने तक रोजा रखा जाता है। इस अवधि के दौरान सूर्योदय से पहले भोजन किया जाता है और पूरे दिन सूर्यास्त तक उपवास किया जाता है। सूर्यास्त के बाद प्रार्थना की जाती है और उसके बाद ही उपवास तोड़ा जाता है। इस नियम का पूरे महीने पालन किया जाता है। इन पवित्र दिनों के दौरान, कुरान शरीफ का पाठ किया जाता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>भारत समूह धर्मो का गुलदस्ता है, इसे बिखरने नहीं देगें : शाही इमाम पंजाब</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:39:57 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Muslim]]></category>
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					<description><![CDATA[ ईद-उल-फितर के मौके पर लुधियाना जामा मस्जिद में हजारों मुसलमानों ने नमाज अदा की लुधियाना:  ईद का दिन नफरतों को मुहब्बत में बदलने का संदेश देता है। जो फिरकापरस्त ताकतें देश में नफरत की राजनीति करना चाहती हैं, उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह बात आज यहां पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना में...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong> ईद-उल-फितर के मौके पर लुधियाना जामा मस्जिद में हजारों मुसलमानों ने नमाज अदा की</strong></h1>
<div>लुधियाना:  ईद का दिन नफरतों को मुहब्बत में बदलने का संदेश देता है। जो फिरकापरस्त ताकतें देश में नफरत की राजनीति करना चाहती हैं, उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह बात आज यहां पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना में ईद उल फितर के मौके पर आयोजित राज्य स्तरीय समागम के दौरान हजारों मुसलमानों को संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कही। शाही इमाम ने कहा कि आज का दिन रोजा रखने वालों के लिए अल्लाह तआला की तरफ  से ईनाम है। उन्होंने कहा कि हम दुआ करते हैं कि आज का दिन दुनिया भर के लोगों के लिए अमन का संदेश लेकर आए। उन्होंने कहा कि देश की जनता की शक्ल में रह रहे करोड़ों हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, दलित आदि एक गुलदस्ता है और इस गुलदस्ते को किसी कीमत पर बिखरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जामा</div>
<div>मस्जिद लुधियाना से हमेशा आपसी भाई-चारे का संदेश दिया गया है, जिसकी मिसाल आज ईद के पवित्र मौके पर यहां मौजूद सभी धर्मों के धार्मिक तथा राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की मौजूदगी है। मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी के लिए लड़ी गई जंग से लेकर आज तक मुसलमानों ने अपने देश के लिए बेशुमार कुर्बानियां दी हैं जिन्हें नजरांदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आज मैं ईद के इस मुबारक मौके पर जहां पंजाब के सभी लोगों को मुबारकबाद देता हूं वहीं अल्लाह से दुआ करता हूं कि आज का दिन इस देश और हमारे राज्य के लिए रहमत और बरकत का पैगाम लेकर आए।</div>
<div> विधायक राकेश पांडे ने मुसलमानों को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा ईद का दिन हर एक भारतीय के लिए खुशी का दिन है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है जहां हर एक धर्म का त्योहार सभी लोग आपस में मिल जुल कर मनाते हैं। श्री पांडे ने कहा कि शाही इमाम साहिब ने हमेशा ही पंजाब में अमन और खुशहाली के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि मैं पंजाब सरकार की ओर से अपने तमाम मुसलमान भाईयों को ईद की मुबारकबाद देता हूं।</div>
<div></div>
<div>
<figure id="attachment_856" aria-describedby="caption-attachment-856" style="width: 300px" class="wp-caption aligncenter"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-856" src="http://blesstvlive.com/storage/2018/06/m2-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" /><figcaption id="caption-attachment-856" class="wp-caption-text">ईद की नमाज़ अदा करते हुए मुस्लिम भाईचारे के लोग.</figcaption></figure>
<p>विधायक सुरिन्द्र डाबर ने मुसलमानों को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि आज का दिन हम सबके लिए बड़ी खुशी का दिन है। उन्होंने कहा कि लुधियाना शहर में सभी धर्मों के लोगों का एक गुलदस्ता है। इसके सभी फूल अपनी खुशबू के साथ माहौल को खुशगवार बना कर रखते हैं। उन्होंने कहा कि लुधियाना की यह इतिहासिक जामा मस्जिद जहां मुसलमानों का मुख्य धार्मिक केन्द्र है, वहीं यह तमाम धर्मों के लोगों के लिए अमन और मुहब्बत की निशानी है।</p>
</div>
<div>इस मौके पर मुसलमानों को ईद की मुबारकबाद देते हुए लुधियाना से जिला कांग्रेस अध्यक्ष गुरप्रीत गोगी ने कहा कि ईद का दिन सिर्फ  मुसलमान भाईयों के लिए ही नहीं बल्कि सभी भारतीयों के लिए खुशी का दिन है। गोगी ने कहा कि मैं दुआ करता हूं कि यह खुशियों भरी रीत हमेशा ऐसे ही चलती रहे।</div>
<div>इस मौके पर अकाली दल शहरी के अध्यक्ष व पूर्व विधायक रणजीत सिंह ढिल्लों ने मुसलमान भाइयों को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि इस तपती हुई गर्मी में पूरा महीना मुसलमान रोजा रखता है और अपने खुदा की इबादत करता है, जिसके बदले में अल्लाह तआला अपने बंदों को ईद का पवित्र त्योहार तोहफे के तौर पर देता है। उन्होंने कहा कि आज के दिन हर मुसलमान अपने सारे गिले शिकवे भूल कर एक दूसरे को गले लगाता है।</div>
<div>मुस्लिम भाईयों को ईद की मुबारकबाद देते हुए पूर्व जेल मंत्री जत्थे. हीरा सिंह गाबडिय़ा ने कहा कि हमें इस बात पर गर्व महसूस होता है कि भारत विश्व का एकमात्र धर्म निरपेक्ष देश है जहां सभी धर्मों के लोग आपस में मिलजुल कर हर त्योहार को बहुत खुशी से मनाते हैं। इस मौके पर हीरा सिंह गाबडिय़ा ने ऐलान किया कि आने वाली 24 जून को गुरुद्वारा फेरुमान में विशेष सम्मान किया जाएगा।</div>
<div>इस मौके पर जामा मस्जिद लुधियाना में अपने मुस्लिम भाईयों को ईद की मुबारकबाद देने के लिए गुरद्वारा दुख निवारण साहिब के अध्यक्ष प्रितपाल सिंह, दुष्यंत पांडे, पूर्व मेयर हरचरण सिंह गोहलवडिय़ा, गुलाम हसन कैसर, पार्षद परमिंदर मेहता, नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान रहमानी लुधियानवी, हरभजन सिंह सोहल, सीनियर अकाली नेता बलजीत सिंह बिंद्रा, शरणजीत मिड्डा, सीनियर कांग्रेसी नेता अशोक गुप्ता,पार्षद गुरप्रीत सिंह गोपी व शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुसतकीम अहरारी विशेष रूप से उपस्थित थे।</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>Eid 2018: नहीं दिखा चांद, अब शनिवार को मनाई जाएगी ईद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:37:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bless]]></category>
		<category><![CDATA[Muslim]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[EID]]></category>
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					<description><![CDATA[आज देश में कहीं भी चांद नजर नहीं आया, चांद के नजर न आने की वजह से अब ईद शनिवार को मनाई जाएगी. जामा मस्जिद की मरकजी रुयते हिलाल कमेटी की बैठक के बाद यह घोषणा की गई. कमेटी ने घोषणा की कि देश में कहीं भी आज चांद नजर नहीं आया. ऐसे में कल...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज देश में कहीं भी चांद नजर नहीं आया, चांद के नजर न आने की वजह से अब ईद शनिवार को मनाई जाएगी.</p>
<p>जामा मस्जिद की मरकजी रुयते हिलाल कमेटी की बैठक के बाद यह घोषणा की गई. कमेटी ने घोषणा की कि देश में कहीं भी आज चांद नजर नहीं आया. ऐसे में कल यानी कि शुक्रवार को ईद नहीं मनाई जाएगी.</p>
<p>देश के किसी भी हिस्से में आज चांद नहीं दिखा, इसलिए अब ईद शनिवार को होगी. इस बार के रमजान का आखिरी रोजा शुक्रवार को होगा.</p>
<p>इस्लामी कैलेंडर के तहत रमजान का महीना पूरा होने पर ही ईद मनाई जाती है.</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>सच्ची कहानी, &#8220;इबादत व बख्श&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Jun 2018 13:57:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हजरत अबुल हसन खिरकानी दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी के एक बहुत महान सूफी संत हुए हैं। यह घटना उनके जीवन से संबंधित है। एक बार उनकी माता जी बीमार पड़ गईं। हजरत अबुल हसन खिरकानी साहब के एक छोटे भाई भी थे। वे भी परमात्मा के भक्त थे। दोनों भाइयों का अधिकतर समय इबादत में ही गुजरता...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हजरत अबुल हसन खिरकानी दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी के एक बहुत महान सूफी संत हुए हैं। यह घटना उनके जीवन से संबंधित है। एक बार उनकी माता जी बीमार पड़ गईं। हजरत अबुल हसन खिरकानी साहब के एक छोटे भाई भी थे। वे भी परमात्मा के भक्त थे। दोनों भाइयों का अधिकतर समय इबादत में ही गुजरता था, लेकिन मां की सेवा और इबादत दोनों में ही व्यवधान न आए, इसके लिए दोनों भाइयों ने काम इस तरह बांट लिया कि एक भाई मां की सेवा में रहता तो दूसरा इबादत में।</p>
<p>दोनों भाई बारी-बारी से रात मां की सेवा और इबादत में बिताते। एक रात भाई की बारी मां की खिदमत करने की थी और हजरत अबुल हसन खिरकानी साहब की इबादत करने की। उस रात उनके छोटे भाई का मन हुआ कि वह रात परमात्मा की इबादत में गुजारें। उन्होंने हजरत अबुल हसन खिरकानी साहब से निवेदन किया कि आज रात आप मां की खिदमत करें, मैं आज की रात इबादत में बिताना चाहता हूं। हजरत अबुल हसन खिरकानी खुशी-खुशी अपने छोटे भाई की बात मान गए और अपनी मां की खिदमत में लग गए। उनके भाई इबादतखाने में चले गए और परमात्मा की इबादत करने लगे।</p>
<p>इबादत शुरू करते ही उन्हें एक दिव्य वाणी सुनाई दी, ‘हमने तेरे भाई को बख्शा (मोक्ष दिया) और उसके तुफैल में (हेतु) तुझे भी बख्शा।’ यह दिव्य वाणी सुनकर छोटे भाई को बड़ा आश्चर्य हुआ। वे बोले ‘या अल्लाह! मैं तेरी इबादत में हूं। चाहिए तो यह था कि मेरा भाई मेरी इबादत के तुफैल में बख्शा जाता।’ आवाज आई ‘तू हमारी इबादत करता है, जिसकी हमे जरूरत नहीं और तेरा भाई मां की खिदमत में है, जिसकी उसे जरूरत है।’ इतना सुनना था कि छोटे भाई को समझ आ गया कि मां की सेवा भी अल्लाह की इबादत ही है।</p>
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		<title>मुस्लमान 14 जून को देखें ईद का चांद : शाही इमाम पंजाब</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Bureau news]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Jun 2018 16:34:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लुधियाना&#124; आज यहां पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना से पंजाब के शाही इमाम व रूअते हिलाल कमेटी पंजाब (चांद देखने वाली कमेटी) के अध्यक्ष मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने पंजाब भर के मुसलमानों से अपील की है कि 14 जून को हर मुसलमान ईद-उल-फितर का चांद जरूर देखे। शाही इमाम ने कहा कि...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div>लुधियाना| आज यहां पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना से पंजाब के शाही इमाम व रूअते हिलाल कमेटी पंजाब (चांद देखने वाली कमेटी) के अध्यक्ष मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने पंजाब भर के मुसलमानों से अपील की है कि 14 जून को हर मुसलमान ईद-उल-फितर का चांद जरूर देखे। शाही इमाम ने कहा कि अगर किसी भी मुसलमान को ईद-उल-फितर का चांद नजर आ जाता है तो वह तुरन्त जामा मस्जिद लुधियाना के इस फोन नं. 0161-2722282 पर सम्पर्क करें ताकि ईद-उल-फितर के चांद का ऐलान किया जा सके। उन्होंने कहा कि अगर 14 जून को ईद-उल-फितर का चांद नजर आ जाता है तो 15 जून दिन शुक्रवार को ईद-उल-फितर का पवित्र त्यौहार मनाया जायेगा। अगर 14 जून को चांद नजर नहीं आता है तो 16 जून दिन शनिवार को ईद-उल-फितर का पवित्र त्यौहार मनाया जायेगा। इस मौके पर शाही इमाम ने बताया कि जामा मस्जिद लुधियाना में ईद-उल-फितर की नमाज सुबह 9.30 बजे अदा की जाएगी।</div>
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